कोटा/जयपुर | 31 जुलाई 2026 राजस्थान के कोटा जिले के कैथून कस्बे से एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसने साबित कर दिया कि मेहनत, लगन और सही मार्गदर्शन के सामने गरीबी भी हार मान लेती है। कबाड़ बीनकर परिवार का पालन-पोषण करने वाले मुरली रेगर के बेटे सागर ने NEET परीक्षा में 564 अंक और 684वीं कैटेगरी रैंक हासिल कर MBBS की राह तय कर ली है।
सरकारी हिंदी माध्यम विद्यालय से पढ़ाई करने वाले सागर के परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि NEET की महंगी कोचिंग का खर्च उठाना संभव नहीं था। ऐसे समय में शिक्षा संबल योजना और एक सामाजिक ट्रस्ट की निशुल्क कोचिंग, आवास एवं भोजन की सुविधा ने उसके सपनों को नई उड़ान दी।
सागर ने बताया कि यदि उसे मुफ्त कोचिंग नहीं मिलती, तो मजबूरी में उसे BSc करनी पड़ती। लेकिन चयन होने के बाद उसने डॉक्टर बनने का संकल्प लिया और लगातार मेहनत कर सफलता हासिल की।
सागर की प्रेरणा उसके परिवार की एक दर्दनाक घटना भी रही। गुटखे के कारण उसकी रिश्तेदार को कैंसर होने के बाद उसने निश्चय किया कि वह डॉक्टर बनकर समाज में नशामुक्ति और स्वास्थ्य जागरूकता के लिए काम करेगा।
दो कमरों के छोटे से घर में रहने वाला यह परिवार आज बेटे की सफलता पर गर्व महसूस कर रहा है। सागर अपने परिवार का पहला डॉक्टर बनेगा और अब अपनी दोनों छोटी बहनों को भी उच्च शिक्षा दिलाने का सपना देख रहा है।
यह कहानी केवल एक छात्र की सफलता नहीं, बल्कि यह संदेश है कि अवसर मिलने पर सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी भी देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं।