Headlines

बाड़मेर में पहचान की चोरी से करोड़ों का GST फर्जीवाड़ा! जूता कारीगर के नाम पर 6.78 करोड़ का टैक्स नोटिस, बैंक खाता फ्रीज

Spread the love

बाड़मेर | 31 जुलाई 2026 राजस्थान के बाड़मेर जिले से पहचान की चोरी (Identity Theft) और जीएसटी फर्जीवाड़े का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। गुड़ामालानी के जीनगर मोहल्ला निवासी एक साधारण जूता कारीगर को अचानक 6,78,97,357 रुपये की जीएसटी बकाया राशि का रिकवरी नोटिस मिलने से हड़कंप मच गया। इतना ही नहीं, वाणिज्यिक कर विभाग के निर्देश पर उनका बैंक खाता भी फ्रीज कर दिया गया।

पीड़ित जितेंद्र कुमार जीनगर का कहना है कि वे प्रतिमाह महज 10 से 15 हजार रुपये की आय से परिवार का पालन-पोषण करते हैं। उन्होंने कभी कोई कंपनी संचालित नहीं की और न ही तमिलनाडु में उनका कोई व्यापारिक संबंध रहा है।

दस्तावेजों का दुरुपयोग होने का संदेह

जितेंद्र के अनुसार, वर्ष 2018 में उन्होंने बाड़मेर की एक निजी फाइनेंस कंपनी से ऋण लेने के दौरान आधार कार्ड और पैन कार्ड की प्रतियां जमा कराई थीं। आशंका है कि इन्हीं दस्तावेजों का दुरुपयोग कर उनके नाम से “श्री शिवम एक्सपोर्ट्स” नामक फर्जी कंपनी का जीएसटी पंजीकरण कराया गया।

कागजों में दिखाया करोड़ों का कारोबार

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, शातिर ठगों ने पीड़ित के पैन कार्ड का उपयोग कर वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2019-20 के बीच करोड़ों रुपये का फर्जी कारोबार दर्शाया और जीएसटी चोरी की। जब 25 जुलाई को जितेंद्र अपने बैंक पहुंचे, तब उन्हें पता चला कि तमिलनाडु वाणिज्यिक कर विभाग के आदेश पर उनका खाता फ्रीज कर दिया गया है।

साइबर अपराध की आशंका

वाणिज्यिक कर विभाग के अधिकारियों ने इसे पहचान की चोरी और साइबर फ्रॉड का मामला मानते हुए पीड़ित को साइबर क्राइम थाने में एफआईआर दर्ज कराने की सलाह दी है। जांच में फर्जी कंपनी के पंजीकरण में उपयोग किए गए मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और बैंक खातों के माध्यम से आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास किया जाएगा।

गरीब परिवार पर संकट

पीड़ित का परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान निर्माण के चलते वे फिलहाल अपने छोटे भाई के घर रह रहे हैं। बैंक खाता फ्रीज होने से परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें भी प्रभावित हो गई हैं। जितेंद्र का कहना है कि वे दिन-रात मेहनत कर जूतियां बनाते हैं और ईमानदारी से जीवनयापन करते हैं, लेकिन अब बिना किसी गलती के करोड़ों रुपये के नोटिस और बैंक खाते पर रोक का सामना करना पड़ रहा है।

यह मामला बताता है कि आधार और पैन जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों का दुरुपयोग किस तरह एक आम नागरिक को गंभीर कानूनी और आर्थिक संकट में डाल सकता है। मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *