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फर्जी डिग्री केस में विधायक समेत कई आरोपियों पर गिरफ्तारी वारंट के आदेश, कोर्ट ने पुलिस प्रशासन को भी लगाई फटकार

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जयपुर | 31 जुलाई 2026 राजस्थान के बहुचर्चित कथित फर्जी डिग्री प्रकरण में श्रीगंगानगर की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (संख्या-2) अदालत ने विधायक जयदीप बिहाणी सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने के आदेश दिए हैं। न्यायालय ने एक वर्ष से अधिक समय तक समन और जमानती वारंट की प्रभावी तामील नहीं होने पर पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर भी कड़ी नाराजगी व्यक्त की है।

सुनवाई के दौरान परिवादी पक्ष की ओर से अदालत को बताया गया कि न्यायालय द्वारा जारी समन और जमानती वारंट की जानकारी होने के बावजूद आरोपी लगातार पेशी से बचते रहे। इस पर अदालत ने सभी आरोपियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए सख्त रुख अपनाते हुए अगली सुनवाई 5 अगस्त निर्धारित की है।

कोर्ट ने जताई नाराजगी

एसीजेएम निधि बेनीवाल ने अपने आदेश में कहा कि 19 मई 2025 को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामले में संज्ञान लिया गया था। इसके बाद कई बार समन, जमानती वारंट और पुलिस अधीक्षक के माध्यम से पत्र भेजे गए, लेकिन आरोपियों की उपस्थिति सुनिश्चित नहीं हो सकी। न्यायालय ने टिप्पणी की कि प्रत्येक पेशी पर केवल औपचारिक तामील रिपोर्ट प्रस्तुत की जाती रही, जबकि आरोपियों को न्यायालय में पेश कराने के लिए प्रभावी प्रयास नहीं किए गए।

एसपी और आईजी को दिए विशेष निर्देश

अदालत ने आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने के साथ पुलिस अधीक्षक, श्रीगंगानगर को निर्देश दिए कि तामील की कार्रवाई प्रतिदिन की जाए और उसका पूरा रिकॉर्ड रोजनामचा में दर्ज कर अगली सुनवाई पर न्यायालय में प्रस्तुत किया जाए। यदि आदेशों की तामील नहीं होती है तो संबंधित अधिकारी को स्वयं उपस्थित होकर लिखित स्पष्टीकरण देना होगा। साथ ही पुलिस महानिरीक्षक, बीकानेर को भी आवश्यक कार्रवाई पर विचार करने के निर्देश दिए गए हैं।

क्या है पूरा मामला?

मामला बिहाणी इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (BIFT) से कथित रूप से फर्जी डिग्री और अंकतालिकाएं जारी करने का है। वर्ष 2015 में न्यायालय के आदेश पर एफआईआर दर्ज हुई थी। परिवाद के अनुसार संस्थान ने विभिन्न विश्वविद्यालयों और नियामक संस्थाओं से मान्यता प्राप्त होने का दावा कर छात्रों से लाखों रुपये शुल्क वसूला, जबकि बाद में पता चला कि संबंधित विश्वविद्यालय उस पाठ्यक्रम का संचालन ही नहीं करता था और संस्थान उसका अधिकृत अध्ययन केंद्र भी नहीं था। इसी मामले में विधायक जयदीप बिहाणी सहित संस्थान के कई पदाधिकारी और अन्य संबंधित व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है।

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