OBC राजनीतिक प्रतिनिधित्व आयोग की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, 92 में से कुछ जातियां राजनीति और सरकारी सेवाओं में सबसे आगे
जयपुर। राजस्थान में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के राजनीतिक और सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर गठित आयोग की रिपोर्ट में महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार OBC आरक्षण के दायरे में आने वाली जातियों में राजनीतिक भागीदारी और सरकारी नौकरियों के मामले में कुछ प्रमुख जातियां अन्य की तुलना में काफी आगे हैं।
ओबीसी राजनीतिक प्रतिनिधित्व आयोग ने पंचायतीराज और स्थानीय निकाय चुनावों में OBC प्रतिनिधित्व से जुड़े अध्ययन के बाद अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को सौंप दी है। आयोग के अध्यक्ष एम.एल. भाटी के अनुसार सर्वे के दौरान प्रत्येक परिवार से 19 सवाल पूछकर आंकड़े जुटाए गए और उनके आधार पर रिपोर्ट तैयार की गई।
राजनीति में इन जातियों की भागीदारी सबसे ज्यादा
रिपोर्ट में राजनीतिक भागीदारी वाले परिवारों के आंकड़ों में जाट-जट सिख सबसे आगे बताए गए हैं। इसके बाद गुर्जर, माली-सैनी-बागवान, कुम्हार-कुमावत और अहीर-यादव प्रमुख रूप से सामने आते हैं।
राजनीतिक भागीदारी वाले परिवारों के प्रमुख आंकड़े:
– जाट, जट सिख: 22,666
– गुर्जर: 9,628
– माली, सैनी, बागवान: 5,994
– कुम्हार (प्रजापति), कुमावत: 5,823
– अहीर (यादव): 3,826
– बढ़ई, जांगिड़, सुथार: 2,725
– बिश्नोई: 2,402
– कलबी, पटेल, आंजणा: 2,326
– नाई, सैन, वेदनाई: 2,079
सरकारी नौकरियों में भी कुछ जातियां आगे
सरकारी सेवाओं से जुड़े आंकड़ों में भी जाट-जट सिख सबसे ऊपर बताए गए हैं। इसके बाद गुर्जर, माली-सैनी, कुम्हार-कुमावत और यादव सहित अन्य जातियां शामिल हैं।
सरकारी नौकरी वाले लोगों के प्रमुख आंकड़े:
– जाट, जट सिख: 1,81,792
– गुर्जर: 44,475
– माली, सैनी, बागवान: 42,912
– कुम्हार (प्रजापति), कुमावत: 40,782
– अहीर (यादव): 39,707
– बढ़ई, जांगिड़, खाती, सुथार: 32,561
– बिश्नोई: 27,273
– नाई, सैन, वेदनाई: 18,174
– कलबी, पटेल, पाटीदार, आंजणा: 13,019
– धाकड़: 11,469
परिवारों की संख्या, BPL और साक्षरता में भी अंतर
रिपोर्ट में OBC की बड़ी आबादी वाली जातियों के परिवारों, गरीबी रेखा से नीचे आने वाले परिवारों और साक्षरता दर का भी विवरण दिया गया है।
सबसे अधिक परिवारों के मामले में जाट-जट सिख सबसे आगे हैं। इनके बाद गुर्जर, कुम्हार-कुमावत, माली-सैनी और बढ़ई-जांगिड़ जैसी जातियां शामिल हैं।
वहीं BPL प्रतिशत के आंकड़ों में धीवर-कहार-भोई समूह का प्रतिशत सबसे अधिक बताया गया है, जबकि अलग-अलग जातियों में साक्षरता दर में भी अंतर सामने आया है।
कई जातियों का प्रतिनिधित्व बेहद कम
आयोग की रिपोर्ट में ऐसे समुदायों का भी उल्लेख है जिनका राजनीतिक प्रतिनिधित्व काफी कम है। तमोली, ठठेरा, भड़भूजा, कुंजड़ा, चोबदार, बागरिया, सिकलीगर, कोतवाल, पटवा, खेरवा, शोरगर, मोगिया, कागजी और फारूकी जैसी जातियों का प्रतिनिधित्व 50 से कम बताया गया है।
वहीं मदारी-बाजीगर, चूनगर, मोची, नट, भोपा, जागरी, हेला, न्यारिया, सिरकीवाल और सपेरा जैसी जातियों का प्रतिनिधित्व 10 से भी कम बताया गया है।
रिपोर्ट में ट्रांसजेंडर वर्ग से 3 प्रतिनिधित्व का भी उल्लेख किया गया है।
अब रिपोर्ट की सिफारिशों पर नजर
OBC राजनीतिक प्रतिनिधित्व आयोग की रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है, जब राजस्थान में पंचायतीराज और स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। ऐसे में आयोग के आंकड़े आने वाले चुनावों में OBC आरक्षण, प्रतिनिधित्व और राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
हालांकि, रिपोर्ट में दिए गए आंकड़े आयोग के सर्वे और अध्ययन पर आधारित हैं; इनके आधार पर किसी जाति की सामाजिक या राजनीतिक स्थिति के बारे में व्यापक निष्कर्ष निकालने से पहले रिपोर्ट की आधिकारिक सिफारिशों और मूल दस्तावेज का संदर्भ देखना उचित होगा।