जयपुर: सीएम का सख्त संदेश एससी-एसटी पर अत्याचार करने वालों के खिलाफ हो कठोर कार्रवाई, मामलों में 28 प्रतिशत की कमी

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जयपुर: दलित अत्याचार मामलों को भले ही विपक्ष सत्ता पक्ष को घेर रहा हो, लेकिन सीएम भजनलाल ने आंकड़ों के साथ स्पष्ठ किया कि राज्य सरकार हर वर्ग को सुरक्षा उपलब्ध कराने को लेकर कटिबद्ध है. इसी कड़ी में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास पर राज्य स्तरीय सतर्कता एवं मॉनिटरिंग समिति की बैठक हुई. बैठक में अनुसूचित जाति एवं जनजाति (एससी-एसटी) वर्ग की सुरक्षा, सम्मान और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा की गई.

इस दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने स्पष्ट निर्देश दिए कि एससी-एसटी वर्ग के विरुद्ध अपराध करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए, साथ ही संवेदनशील मामलों की त्वरित जांच कर समयबद्ध न्याय सुनिश्चित किया जाए. सीएम ने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि 60 दिन में 68% मामलों का निस्तारण किया गया है. प्रदेश में एससी-एसटी अत्याचार के मामलों में 28 प्रतिशत की कमी आई है. आज अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत आयोजित राज्य स्तरीय सतर्कता एवं मॉनिटरिंग समिति की बैठक में अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन, लंबित प्रकरणों की स्थिति तथा पीड़ितों को समयबद्ध न्याय, राहत एवं पुनर्वास की प्रगति की समीक्षा की।

एससी-एसटी की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता:

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है. उन्होंने बताया कि सरकार के पिछले ढाई वर्षों के प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आया है. वर्ष 2023 की तुलना में वर्ष 2025 में एससी-एसटी अत्याचार के मामलों में लगभग 28 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है. मुख्यमंत्री ने बताया कि एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज मामलों के निस्तारण में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है.वर्तमान में लगभग 68 प्रतिशत प्रकरणों का निस्तारण 60 दिन की निर्धारित अवधि के भीतर किया जा रहा है. वहीं, मामलों के निस्तारण का औसत समय 128 दिन से घटकर 53 दिन रह गया है.

सभी पुलिस जिलों में बनेंगे एससी-एसटी सेल:

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य के 45 पुलिस जिलों में एससी-एसटी सेल स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि शेष छह पुलिस जिलों में भी जल्द इनकी स्थापना की जाएगी. उन्होंने पुलिस और अभियोजन विभाग को समन्वय के साथ कार्य कर दोष सिद्धि की दर बढ़ाने के निर्देश दिए. मुख्यमंत्री ने जिला एवं उपखंड स्तर पर निगरानी एवं सतर्कता समिति की बैठकें नियमित रूप से आयोजित करने के निर्देश दिए. साथ ही वर्ष में दो बार पंचायत स्तर पर भी बैठकों का आयोजन कर सामाजिक समरसता और आपसी मेलजोल को बढ़ावा देने पर जोर दिया.

पीड़ितों को समय पर मिले आर्थिक सहायता:

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि दर्ज मामलों की लगातार निगरानी की जाए और एक वर्ष से अधिक समय से लंबित मामलों के निस्तारण के लिए विशेष अभियान चलाया जाए. उन्होंने कहा कि एफआईआर दर्ज होने से लेकर न्यायालय में अंतिम निर्णय तक पीड़ितों को अधिनियम के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता समय पर उपलब्ध कराई जाए. बैठक में सहायता संबंधी लंबित प्रकरणों की थाना एवं जिला स्तर पर नियमित समीक्षा, हेल्पलाइन, हेल्पडेस्क और पोर्टलों पर प्राप्त शिकायतों की रियल टाइम मॉनिटरिंग के साथ राष्ट्रीय हेल्पलाइन पर आने वाली शिकायतों के जल्द निस्तारण पर भी चर्चा हुई. मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को संवेदनशीलता और समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए.

अत्याचार के मामलों में लगातार गिरावट:

वर्ष 2024 की तुलना में वर्ष 2025 में एससी-एसटी अत्याचार के मामलों में 15.88 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई.

वर्ष 2025 के पहले छह माह की तुलना में वर्ष 2026 की समान अवधि में 15.49 प्रतिशत की कमी आई.

वर्ष 2023 में केवल 35.16 प्रतिशत मामलों का निस्तारण 60 दिन में होता था, जो वर्ष 2025 में लगभग 47 प्रतिशत और जुलाई 2026 तक 67.88 प्रतिशत पहुंच गया.

एफआर लगे मामलों में अब 10 प्रतिशत के स्थान पर 20 प्रतिशत रैंडम सत्यापन किया जा रहा है.

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