जयपुर | 16 जुलाई राजधानी जयपुर के बिड़ला सभागार में गुरुवार को होम्योपैथी विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह गरिमामय माहौल में आयोजित किया गया। समारोह में राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने भारतीय चिकित्सा ज्ञान परंपरा, नैतिक मूल्यों और वैज्ञानिक अनुसंधान को स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती का आधार बताते हुए युवा चिकित्सकों से समाजहित में समर्पित भाव से कार्य करने का आह्वान किया।
अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि भारत सदियों से चिकित्सा ज्ञान और उपचार पद्धतियों का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में ऐसी सभी चिकित्सा प्रणालियों को सम्मान और अवसर मिलना चाहिए जो लोगों के उपचार और कल्याण में प्रभावी साबित हों। साथ ही उन्होंने होम्योपैथी के क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और गुणवत्ता आधारित कार्य को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
समारोह में केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री प्रताप राव जाधव ने कहा कि भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियां आज वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान बना रही हैं। उन्होंने युवाओं से अनुसंधान, नवाचार और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से विकसित भारत और स्वस्थ भारत के लक्ष्य में सक्रिय योगदान देने की अपील की।
कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के संस्थापक पूर्व सांसद डॉ. मनोज राजोरिया और राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग के अध्यक्ष डॉ. तारकेश्वर जैन ने विश्वविद्यालय की स्थापना की प्रेरणा और होम्योपैथी शिक्षा के विस्तार पर अपने विचार साझा किए।
दीक्षांत समारोह में सफल विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इसके अलावा चिकित्सा, अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया।
समारोह का मुख्य संदेश यही रहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान और समर्पित स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से देश की चिकित्सा व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाया जा सकता है।