ओम बिरला का बड़ा संदेश: BRICS को चर्चाओं से आगे बढ़कर ठोस परिणाम देने होंगे, जन-केंद्रित विकास के लिए संसदों को मजबूत बनाना जरूरी

ओम बिरला का बड़ा संदेश: BRICS को चर्चाओं से आगे बढ़कर ठोस परिणाम देने होंगे, जन-केंद्रित विकास के लिए संसदों को मजबूत बनाना जरूरी
नई दिल्ली | 26 अक्टूबर 2026 भारत की संसद के ऐतिहासिक संविधान सदन में आयोजित 12वें BRICS संसदीय मंच, 2026 में लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने सदस्य एवं साझेदार देशों के संसदीय प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए जन-केंद्रित विकास, लोकतांत्रिक मूल्यों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि BRICS की सफलता केवल चर्चाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इन चर्चाओं से ऐसे ठोस परिणाम निकलने चाहिए, जिनका लाभ आम नागरिकों तक पहुंचे।

लोकसभा अध्यक्ष ने भारत की 140 करोड़ जनता की ओर से BRICS देशों के प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि भारत की संसद में आयोजित यह मंच संवाद, पारस्परिक सम्मान और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

🔹 वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए संवाद और सहयोग जरूरी

अपने संबोधन में ओम बिरला ने कहा कि वर्तमान विश्व क्षेत्रीय संघर्षों, युद्ध, आर्थिक अस्थिरता, व्यापारिक तनाव, आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। इन समस्याओं का प्रभाव किसी एक देश तक सीमित नहीं रहता, इसलिए इनके समाधान के लिए संवाद, कूटनीति और आपसी सहयोग को प्राथमिकता देना आवश्यक है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि संसदें आपसी समझ और विश्वास बढ़ाने, अंतरराष्ट्रीय तनाव कम करने तथा वैश्विक समस्याओं के शांतिपूर्ण समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

🔹 BRICS देशों की सामूहिक शक्ति पर दिया जोर

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि BRICS देश विश्व की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। सदस्य देशों की भौगोलिक, सांस्कृतिक, भाषाई और सामाजिक विविधताओं के बावजूद लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवता के प्रति साझा जिम्मेदारी उन्हें एक सूत्र में जोड़ती है।

उन्होंने BRICS को ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण मंच बताते हुए कहा कि साझा आकांक्षाओं को व्यावहारिक सहयोग और ठोस नीतियों में बदलना समय की आवश्यकता है।

🔹 जन-केंद्रित विकास के लिए संसदों को सशक्त बनाने पर मंथन

12वें BRICS संसदीय मंच का मुख्य विषय 'जन-केंद्रित विकास हेतु संसदों को सुदृढ़ बनाना' है। इस विषय के तहत दो दिवसीय विचार-विमर्श में चार प्रमुख क्षेत्रों पर चर्चा की जा रही है।
रेजिलिएंस (Resilience): चुनौतियों का सामना करने की क्षमता और संस्थागत मजबूती।
इनोवेशन (Innovation): संसदीय कार्यप्रणाली में नए विचारों और तकनीकों को अपनाना।
को-ऑपरेशन (Co-operation): सदस्य देशों के बीच सहयोग और अनुभवों का आदान-प्रदान।
सस्टेनेबिलिटी (Sustainability): पर्यावरण संरक्षण के साथ सतत विकास को बढ़ावा देना।

ओम बिरला ने कहा कि संसदों को कानून निर्माण, बजट, विचार-विमर्श और निगरानी के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को धरातल पर उतारने में प्रभावी योगदान देना चाहिए।

🔹 पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतंत्र की मजबूत नींव

लोकसभा अध्यक्ष ने भारत को लोकतंत्र की जननी बताते हुए कहा कि भारतीय लोकतंत्र संवाद, वैचारिक विविधता और सहमति-असहमति के बावजूद परस्पर सम्मान की भावना पर आधारित है।

उन्होंने कहा कि संसदीय संस्थाओं को समय के अनुरूप अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव करते हुए पारदर्शिता, जवाबदेही और जनभागीदारी को मजबूत बनाना चाहिए। नवाचार का उद्देश्य लोकतांत्रिक संस्थाओं को अधिक प्रभावी, सहभागी और जन-केंद्रित बनाना होना चाहिए।

🔹 युवाओं की प्रतिभा को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने पर जोर

अपने संबोधन में ओम बिरला ने युवा पीढ़ी की आकांक्षाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं के पास गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और तकनीकी ज्ञान है। उन्हें उनकी प्रतिभा के अनुरूप अवसर उपलब्ध कराना और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करना आवश्यक है।

उन्होंने संसदों से युवाओं की आवाज को उचित स्थान देने तथा उनकी क्षमता को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने की दिशा में कार्य करने का आह्वान किया।

🔹 विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन जरूरी

लोकसभा अध्यक्ष ने भारतीय दर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के पूरक हैं। इसलिए सतत विकास को बढ़ावा देने के साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने संसदीय कूटनीति को अंतरराष्ट्रीय सहयोग का प्रभावी माध्यम बताते हुए कहा कि सभी देशों को एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करते हुए अपने अनुभव साझा करने चाहिए। इससे आपसी समझ मजबूत होगी और साझा चुनौतियों के समाधान के लिए ठोस कदम उठाने में मदद मिलेगी।

🔹 चर्चाओं से आगे बढ़कर समाधान आधारित सहयोग का आह्वान

अपने संबोधन के समापन में ओम बिरला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के BRICS को समाधान-केंद्रित व्यवस्था बनाने के दृष्टिकोण का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि किसी भी मंच की वास्तविक सफलता उसके विचार-विमर्श से उत्पन्न परिणामों और आम नागरिकों के जीवन में आने वाले सकारात्मक बदलावों से आंकी जानी चाहिए।

उन्होंने सदस्य देशों की संसदों से साझा चुनौतियों का समाधान तलाशने, सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का आदान-प्रदान करने और अधिक न्यायसंगत, समावेशी तथा शांतिपूर्ण विश्व के निर्माण के लिए मिलकर काम करने का संदेश दिया।

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