23 स्कूलों में विधिक जागरूकता शिविर, बच्चों को अपहरण-व्यपहरण, पॉक्सो और साइबर सुरक्षा की दी जानकारी
सिरोही। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देशानुसार जिले में सितंबर माह की निर्धारित थीम “Stranger Danger – NO-GO-TELL” को लेकर व्यापक विधिक जागरूकता अभियान चलाया गया। जिला एवं सेशन न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री अजय शर्मा के निर्देशन में आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से करीब 4000 विद्यार्थियों को बच्चों की सुरक्षा, व्यक्तिगत सीमाओं और असुरक्षित परिस्थितियों से बचाव के संबंध में जागरूक किया गया।
“Transformative Tuesdays” कार्यक्रम के तहत जिला मुख्यालय सहित विभिन्न तालुका क्षेत्रों के 23 सरकारी एवं निजी विद्यालयों में न्यायिक अधिकारियों ने विद्यार्थियों से संवाद किया। इस दौरान उन्हें समझाया गया कि सुरक्षा का मतलब डरना नहीं, बल्कि परिस्थितियों के प्रति सतर्क और जागरूक रहना है।
क्या है NO-GO-TELL?
विद्यार्थियों को सुरक्षा के तीन सरल चरण समझाए गए। किसी भी असहज या संदिग्ध स्थिति में “NO” यानी स्पष्ट रूप से मना करें, “GO” यानी वहां से तुरंत सुरक्षित स्थान की ओर जाएं और “TELL” यानी पूरी घटना की जानकारी माता-पिता, शिक्षक या किसी भरोसेमंद बड़े व्यक्ति को दें।
जिला एवं सेशन न्यायाधीश अजय शर्मा ने इमानुअल मिशन उच्च माध्यमिक विद्यालय, सिरोही में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चों की सुरक्षा केवल परिवार की नहीं, बल्कि विद्यालय और पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती सावित्री आनंद निर्भीक ने कालिन्द्रि क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों में विद्यार्थियों को व्यक्तिगत सीमाओं, निजता और सुरक्षित व्यवहार के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बच्चों को अनजान लोगों से मिलने वाले उपहार, प्रलोभन या किसी स्थान पर साथ चलने के आग्रह के प्रति सावधान रहने की सलाह दी।
वहीं पारिवारिक न्यायाधीश श्री सुरेन्द्र सिंह सांदू, विशिष्ट न्यायाधीश पॉक्सो सुश्री शैल कुमारी सोलंकी, अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश श्री ललित डाबी, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रीमती अलका जोशी तथा न्यायिक मजिस्ट्रेट सुश्री भारती उपाध्याय सहित अन्य न्यायिक अधिकारियों ने जिले के अलग-अलग विद्यालयों में विद्यार्थियों को जागरूक किया।
अपहरण और व्यपहरण का अंतर भी समझाया
शिविरों में विद्यार्थियों को बाल संरक्षण कानूनों की आयु-अनुकूल जानकारी देते हुए अपहरण और व्यपहरण के बीच अंतर भी समझाया गया। साथ ही बच्चों को पॉक्सो अधिनियम-2012, भारतीय न्याय संहिता-2023 तथा बाल अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण प्रावधानों की जानकारी दी गई।
ऑनलाइन अजनबियों से भी रहें सतर्क
कार्यक्रम में केवल आमने-सामने होने वाले जोखिमों ही नहीं, बल्कि ऑनलाइन अजनबियों और साइबर खतरों पर भी विशेष जोर दिया गया। विद्यार्थियों को अनजान लोगों के संदेश, संदिग्ध ऑनलाइन संपर्क, निजी जानकारी एवं फोटो साझा करने से बचने तथा ऑनलाइन ग्रूमिंग जैसे डिजिटल जोखिमों के प्रति सावधान किया गया।
हेल्पलाइन नंबरों की दी जानकारी
विद्यार्थियों को जरूरत पड़ने पर सहायता लेने के लिए चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, पुलिस आपातकालीन सेवा 100/112, राजस्थान विधिक सेवा प्राधिकरण हेल्पलाइन 15100 एवं 9928900900 तथा महिला हेल्पलाइन 181 की जानकारी भी दी गई। साथ ही निःशुल्क विधिक सहायता प्राप्त करने के बारे में बताया गया।
कार्यक्रम के समापन पर विद्यार्थियों ने असुरक्षित परिस्थितियों में सतर्क रहने, NO-GO-TELL नियम अपनाने और किसी भी संदिग्ध घटना को छिपाने के बजाय तुरंत विश्वसनीय व्यक्ति को बताने का संकल्प लिया।
जिले में आयोजित इन जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से 16 न्यायिक अधिकारियों ने 23 विद्यालयों के लगभग 4000 विद्यार्थियों तक पहुंच बनाकर बच्चों को सुरक्षित व्यवहार और उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक किया।