बच्चों की सुरक्षा पर उठे सवाल, पोलियो बूथ पर सामान्य मार्कर के उपयोग का मामला चर्चा में
सिरोही। ( रिपोर्टर, महेंद्र सिंह परिहार ) सिरोही जिले में पल्स पोलियो अभियान के दौरान निर्धारित गाइडलाइन के पालन को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। अभियान के दौरान सामने आई कुछ तस्वीरों में बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने के बाद उनकी उंगली पर निशान लगाने के लिए कथित तौर पर इंडीलेबल मार्कर के बजाय सामान्य परमानेंट मार्कर का उपयोग होता दिखाई दे रहा है। मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान में बच्चों की उंगली पर निशान लगाने के लिए विशेष इंडीलेबल मार्कर के उपयोग का प्रावधान है। आरोप है कि सिरोही जिले के कुछ पोलियो बूथों पर इसकी जगह कैमलिन परमानेंट मार्कर का इस्तेमाल किया गया। तस्वीरों के आधार पर यह सवाल उठ रहा है कि क्या अभियान के लिए निर्धारित इंडीलेबल मार्कर उपलब्ध नहीं कराए गए थे या उपलब्ध होने के बावजूद उनका उपयोग नहीं किया गया।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार चिकित्सा अभियानों में निर्धारित सामग्री का उपयोग करना आवश्यक माना जाता है। सामान्य स्टेशनरी परमानेंट मार्कर चिकित्सा उपयोग के लिए तैयार नहीं किए जाते। हालांकि इस मामले में किसी बच्चे के बीमार होने या स्वास्थ्य संबंधी प्रतिकूल प्रभाव की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है, फिर भी विशेषज्ञ निर्धारित मानकों का पालन करने पर जोर देते हैं।
मामले को लेकर यह मांग भी उठ रही है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि यदि गाइडलाइन का उल्लंघन हुआ है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है और भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।
फिलहाल इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विभाग का पक्ष आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।