आबूरोड में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का भव्य आयोजन, राधारानी के नृत्य और झूले में सजे कान्हा ने मोहा मन

Spread the love

राजयोगिनी ऊषा दीदी ने कहा—परमात्मा जीवन के सात बंधनों से मुक्त कर श्रीकृष्ण की दिव्य दुनिया में चलने योग्य बना रहे

आबूरोड। ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के मुख्यालय शांतिवन में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धा, उल्लास और आध्यात्मिक वातावरण के बीच धूमधाम से मनाया गया। समारोह में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया। बालिकाओं ने राधारानी के स्वरूप में मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया, वहीं आकर्षक ढंग से सजाए गए पालने में झूलते कान्हा ने श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खींचा।

समारोह को संबोधित करते हुए गीता ज्ञान विशेषज्ञ राजयोगिनी बीके ऊषा दीदी ने श्रीकृष्ण के जीवन को सर्वगुण संपन्न, मर्यादा पुरुषोत्तम और 16 कला संपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण के जन्म से जुड़ी कथा में जेल के सात ताले आध्यात्मिक रूप से मानव जीवन के सात प्रमुख बंधनों का प्रतीक माने जा सकते हैं।

🔹 जीवन के सात बंधनों से मुक्ति का संदेश

बीके ऊषा दीदी ने सात बंधनों की व्याख्या करते हुए कहा कि—

1. देह का बंधन: देह अभिमान और अहंकार मनुष्य के लिए सबसे बड़े बंधनों में से एक हैं।

2. मन का बंधन: कमजोर और नकारात्मक विचार व्यक्ति की प्रगति में बाधा बनते हैं।

3. संबंधों का बंधन: देह के संबंधों और ‘मेरेपन’ का मोह मनुष्य को उसके वास्तविक उद्देश्य से दूर कर सकता है।

4. धन का बंधन: धन की चिंता में मनुष्य कई बार मानवीय मूल्यों को पीछे छोड़ देता है।

5. कर्मों का बंधन: गलत कर्मों का प्रभाव मनुष्य को कर्मभोग के रूप में बांधे रखता है।

6. धर्म का बंधन: अनेक मत-पंथ और संप्रदायों के बीच मनुष्य अपने वास्तविक स्वधर्म को भूल जाता है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक दृष्टि से हम सभी परमपिता परमात्मा की संतान और आपस में भाई-भाई हैं।

7. समय का बंधन: वर्तमान जीवन में समय का अभाव भी मनुष्य के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। व्यक्ति बहुत कुछ करना चाहता है, लेकिन समय की कमी के कारण कई इच्छाएं अधूरी रह जाती हैं।

उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक ज्ञान और राजयोग के माध्यम से परमात्मा मनुष्य आत्माओं को इन बंधनों से मुक्त कर नई, सतयुगी और दिव्य दुनिया में चलने के योग्य बना रहे हैं।

ज्ञान और राजयोग से जीवन को दिव्य बनाने का संदेश

दिल्ली पांडव भवन की निदेशिका राजयोगिनी बीके पुष्पा दीदी ने कहा कि परमपिता शिव परमात्मा सच्चा गीता ज्ञान देकर मानव जीवन को श्रीकृष्ण की दिव्य दुनिया के योग्य बनाने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ज्ञान मुरली मनुष्य को जीवन की अनेक समस्याओं का समाधान समझने और अपने जीवन को श्रेष्ठ एवं दिव्य बनाने की दिशा दिखाती है।

इस अवसर पर वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका बीके रुक्मिणी दीदी ने परमात्मा को भोग स्वीकार कराया। वहीं मधुरवाणी ग्रुप के बीके सतीश भाई एवं साथियों ने जन्माष्टमी के अवसर पर मधुर गीतों की प्रस्तुति देकर आध्यात्मिक माहौल को और भक्तिमय बना दिया।

समारोह के दौरान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की आकर्षक झांकी और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक संदेश के साथ जन्माष्टमी उत्सव का आनंद लिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *