जयपुर/सिरोही। ( रिपोर्टर, महेंद्र सिंह परिहार ) राजस्थान सरकार ने प्रदेश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक मजबूत करने तथा मातृ मृत्यु दर (MMR) को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए एक बड़े अभियान की घोषणा की है। प्रदेशभर में आगामी 15 जुलाई से 5 दिवसीय विशेष सघन स्क्रीनिंग अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत हर गर्भवती महिला के स्वास्थ्य मानकों की बारीकी से जांच की जाएगी और उनकी नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाएगी।
प्रमुख शासन सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य) श्रीमती गायत्री राठौड़ ने मंगलवार को स्वास्थ्य भवन में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में राज्य के सभी चिकित्साधिकारियों को इसके कड़े निर्देश जारी किए हैं।
लापरवाही पर तय होगी जवाबदेही, आशा-एएनएम और सीएचओ संभालेंगे कमान
श्रीमती गायत्री राठौड़ ने स्पष्ट किया कि मातृ मृत्यु की हर एक घटना अत्यंत गंभीर है। उन्होंने निर्देश दिए कि फील्ड में कार्यरत आशा वर्कर, एएनएम (ANM) और सीएचओ (CHO) के माध्यम से स्क्रीनिंग का यह कार्य पूरी संवेदनशीलता और गंभीरता से कराया जाए।
”गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच और नियमित ट्रैकिंग में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि कोई लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित फील्ड स्टाफ से लेकर उच्च अधिकारियों तक की जवाबदेही तय कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
श्रीमती गायत्री राठौड़, प्रमुख शासन सचिव
अभियान की मुख्य बातें और रणनीति
12 सप्ताह में पंजीकरण: हर गर्भवती महिला का गर्भधारण के प्रथम 12 सप्ताह के भीतर शत-प्रतिशत पंजीकरण अनिवार्य होगा, जिसे समय पर पीसीटीएस (PCTS) पोर्टल पर दर्ज करना होगा।
4 अनिवार्य एएनसी जांच (ANC Checkups) गर्भावस्था के दौरान प्रत्येक महिला की कम से कम चार गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व जांचें (ANC) अनिवार्य रूप से की जाएंगी। इसमें मुख्य रूप से रक्तचाप (BP), हीमोग्लोबिन, वजन, यूरिन टेस्ट और ब्लड शुगर जैसी महत्वपूर्ण जांचें शामिल होंगी।
लेबर रूम और ओटी गाइडलाइंस की सख्ती: एनएचएम मिशन निदेशक डॉ. जोगाराम ने निर्देश दिए कि सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) लेबर रूम और ऑपरेशन थिएटर (OT) के सुरक्षा मानकों व एसओपी का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करें और समय-समय पर इन्हें सैनिटाइज करवाएं।
हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (HRP) के लिए बनेगा स्पेशल ट्रैकिंग सिस्टम
बैठक में एनीमिया (खून की कमी), उच्च रक्तचाप, मधुमेह (डायबिटीज), पूर्व सिजेरियन डिलीवरी, जुड़वां गर्भ या अत्यधिक रक्तस्राव जैसी जटिलताओं वाली महिलाओं को हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (HRP) के रूप में चिन्हित करने पर विशेष जोर दिया गया।
नामवार सूची: प्रत्येक एचआरपी (HRP) महिला की एक नामवार सूची उप-स्वास्थ्य केंद्र से लेकर जिला स्तर तक उपलब्ध रहेगी।
विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा: इन हाई रिस्क मामलों का विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा नियमित फॉलोअप और समीक्षा की जाएगी।
रिफरल पर्ची अनिवार्य: निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. रवि प्रकाश शर्मा ने निर्देश दिए कि रेफरल मामलों में मरीज के साथ संपूर्ण चिकित्सकीय विवरण (केस हिस्ट्री) भेजना अनिवार्य होगा।
24 घंटे के भीतर होगा मातृ मृत्यु का प्रारंभिक रिव्यू
प्रशासन ने स्वास्थ्य सेवाओं की मॉनिटरिंग को बेहद कड़ा कर दिया है। अब यदि प्रदेश में कहीं भी मातृ मृत्यु की घटना होती है, तो 24 घंटे के भीतर उसका प्रारंभिक विश्लेषण (मैटरनल डेथ रिव्यू) किया जाएगा। इसके साथ ही जिला स्तर पर हर सप्ताह हाई रिस्क प्रेग्नेंसी और मातृ मृत्यु के मामलों की साप्ताहिक समीक्षा की जाएगी।
सभी चिकित्सा संस्थानों को जीवनरक्षक दवाओं, पर्याप्त रक्त (Blood Units), चालू हालत में नवजात पुनर्जीवन उपकरणों (Neonatal Resuscitation Equipment) की उपलब्धता बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि कोई भी महिला सुरक्षित प्रसव से वंचित न रहे।
इस वर्चुअल बैठक में चिकित्सा शिक्षा, एनएचएम और निदेशालय स्तर के अधिकारियों सहित सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO), आरसीएचओ (RCHO) और ब्लॉक स्तरीय अधिकारी जुड़े रहे। सिरोही जिला स्तर से सीएमएचओ डॉ. दिनेश खराड़ी सहित पूरी डीपीएमयू यूनिट ने भी बैठक में भाग लिया।