जालोर में लिव-इन रिलेशनशिप पर पंचायत का फरमान, 21 लाख जुर्माना और सामाजिक बहिष्कार का आरोप

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जालोर: लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर पंचायत पर 21 लाख रुपये का जुर्माना लगाने का आरोप, 11 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज

 

जालोर: राजस्थान के जालोर जिले में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर समाज की पंचायत के कथित फैसले ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। एक परिवार ने आरोप लगाया है कि पंचायत ने उनके बेटे और उसके साथ रह रही युवती के संबंधों का विरोध करते हुए 21 लाख रुपये का जुर्माना लगाया, पूरे परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दिया और धार्मिक व सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल होने पर भी रोक लगा दी।

परिजनों के अनुसार, 21 वर्षीय युवती का पहले बाल विवाह हुआ था, लेकिन वर्ष 2024 में उसका तलाक हो गया। इसके बाद नवंबर 2025 से वह अपनी इच्छा से समाज के ही 22 वर्षीय युवक के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहने लगी। परिवार का कहना है कि युवती के परिजनों को इस संबंध से कोई आपत्ति नहीं थी, लेकिन समाज के कुछ पंचों ने इसका विरोध किया।

आरोप है कि पहले पंचायत में दोनों को अलग होने की चेतावनी दी गई। इसके बाद 20 अप्रैल 2026 को आयोजित दूसरी बैठक में युवक के परिवार पर 21 लाख रुपये का आर्थिक दंड लगाने और सामाजिक बहिष्कार का निर्णय सुनाया गया। पीड़ित परिवार का कहना है कि इसके बाद उन्हें समाज से अलग-थलग कर दिया गया, धार्मिक स्थल में प्रवेश से रोका गया और एक रिश्तेदार के कार्यक्रम में भी शामिल नहीं होने दिया गया।

परिवार की शिकायत पर 11 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। हालांकि पीड़ित पक्ष का आरोप है कि एफआईआर दर्ज होने के बावजूद अब तक आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसी मांग को लेकर परिवार पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचा और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की।

पुलिस अधीक्षक शैलेंद्र सिंह ने बताया कि मामले की जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध तथ्यों और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

यह मामला एक बार फिर इस बहस को सामने लाया है कि क्या किसी सामाजिक पंचायत को बालिग व्यक्तियों के निजी जीवन में हस्तक्षेप करने, आर्थिक दंड लगाने या सामाजिक बहिष्कार जैसे फैसले लेने का अधिकार है। अब इस पूरे प्रकरण में आगे की दिशा पुलिस जांच और कानूनी प्रक्रिया तय करेगी।

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