झोपड़ी बचाने पुलिस से भिड़ी लड़की, घर बचाने को छत पर चढ़ीं बालिकाएं. बाड़मेर में पीला पंजा पहुंचते ही मचा हंगामा

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बाड़मेर: जिले में अवैध अतिक्रमणों पर प्रशासन की ताबड़तोड़ कार्रवाई जारी है. बुधवार को बाड़मेर जिला मुख्यालय पर प्रशासनिक अमले ने तिलक नगर इलाके में सरकारी जमीन पर हुए अवैध अतिक्रमण पर पीला पंजा चलते हुए कई कच्चे-पक्के निर्माण को जमींदोज किया. इस कार्रवाई के दौरान अतिक्रमण हटाने के लिए पहुंची टीम को विरोध का सामना करना पड़ा. अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान अपने घर पर पीला पंजा नहीं चले, इसलिए परिवार की बालिकाओं-महिलाओं ने जमकर विरोध किय. घर की एक-दो लड़कियां कमरे की छत पर लगी टीन शेड पर चढ़ गईं. जबकि एक लड़की घर की झोपड़ी में जा बैठी, जो घर से बाहर निकलने को तैयार नहीं थी.

पुलिस ने उसे समझाने का खूब प्रयास किया, लेकिन बाहर नहीं निकली. इसके बाद महिला कांस्टेबल ने उसे बाहर निकाला, लेकिन वह कोशिश करती रही कि जैसे-तैसे अपनी झोपड़ी को बचा ले. इस दौरान पुलिस से हल्की नोकझोंक भी हुई. तहसीलदार हुकुमचंद ने विरोध कर रही महिलाओं को समझाया कि आगोर कि जमीन के पट्टे नहीं बनते हैं. सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हो हटाया जाएगा. शहर के तिलक नगर में बुधवार को उपखंड अधिकारी यथार्थ शेखर, तहसीलदार हुकमचंद, बाड़मेर पुलिस उपाधीक्षक रमेश कुमार शर्मा के साथ चार थानाधिकारी मय जाब्ता के पहुंचे. आगोर की जमीन हुए अतिक्रमण पर पांच जेसीबी मशीनों की मदद से कार्रवाई की गई. इस दौरान कच्चे-पक्के निर्माण को ध्वस्त किया गया. इस कार्रवाई के दौरान अधिकांश कच्चे निर्माण और झोपड़ियों को ध्वस्त किया गया.

प्रशासन द्वारा इन दिनों जिले में अवैध अतिक्रमण पर विशेष अभियान चलाकर लगातार कार्रवाई की जा रही है:

इसी के तहत बुधवार को जिला मुख्यालय पर कार्रवाई को अंजाम दिया गया. इसके चलते बाड़मेर ग्रामीण पंचायत क्षेत्र के आगोर की सरकारी जमीन पर हुए अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई की गई. स्थानीय अणशी ने बताया कि परिवार में कोई कमाने वाला नहीं है. वह पिछले कई वर्षों से यहां रह रही है. घर में बेटियां हैं और कच्ची झोपड़ी बनाई हुई थी, जिसे आज गिरा दिया है. उन्होंने कहा कि हम गरीब लोग हैं. हमारे तो कमाने वाला भी कोई नहीं है. इसी तरह हेमनाथ ने बताया कि वह पिछले 40 वर्षों से यहां पर रह रहे हैं और दो-ढाई साल पहले ही यहां पर ईटों से कमरा बनाया था. यह सरकारी आगोर की जमीन है. हम लोग भूमिहीन हैं. सरकार से यही मांग है कि हमें बैठने के लिए जमीन दे.

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