जयपुर | 15 जुलाई 2026 राजस्थान विधानसभा के गौरवमयी 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित अमृत महोत्सव के तहत बुधवार को विधानसभा में दूसरे सत्र का आयोजन हुआ। इस विशेष सत्र में वर्तमान और पूर्व विधायकों ने पिछले साढ़े सात दशकों में बने राज्य के महत्वपूर्ण जनहितकारी कानूनों पर व्यापक चर्चा करते हुए लोकतांत्रिक मूल्यों, संसदीय परंपराओं और जनकल्याणकारी कानूनों की भूमिका पर विचार साझा किए।
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा कि विधानसभा की पहचान सदैव संसदीय शुचिता, अध्ययनशीलता और वैचारिक मर्यादा रही है। उन्होंने नए जनप्रतिनिधियों से गहन अध्ययन करने, विधानसभा पुस्तकालय का अधिक उपयोग करने और स्वस्थ लोकतांत्रिक संवाद की परंपरा को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
सत्र में कई महत्वपूर्ण कानूनों पर वरिष्ठ नेताओं ने अपने विचार रखे। पूर्व विधायक राजेंद्र राठौड़ ने राजस्थान कोचिंग सेंटर (नियंत्रण एवं विनियमन) अधिनियम, 2025 को विद्यार्थियों के हित में ऐतिहासिक कदम बताया। सांसद राव राजेंद्र सिंह ने राजस्थान टेनेंसी अधिनियम, 1955 को किसानों और काश्तकारों के अधिकारों की रक्षा करने वाला मील का पत्थर बताया।
पूर्व मंत्री कालीचरण सराफ ने धर्म-संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2025 को धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक सौहार्द की सुरक्षा से जुड़ा कानून बताया। वहीं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष दीपेंद्र सिंह शेखावत ने गिग कर्मकार (रजिस्ट्रीकरण एवं कल्याण) अधिनियम, 2023 को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े लाखों श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा की दिशा में ऐतिहासिक पहल बताया।
पूर्व विधायक तारा भंडारी ने राजस्थान सती (निवारण) अधिनियम, 1987 को महिला सम्मान और सामाजिक सुधार का मजबूत प्रतीक बताया। पूर्व मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला ने राजस्थान प्राथमिक शिक्षा अधिनियम, 1964 को शिक्षा के विस्तार और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
इसके अलावा पंचायत राज, सहकारी समितियों और भूमि राजस्व से जुड़े कानूनों पर भी वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए राज्य के विकास में इनकी भूमिका को रेखांकित किया।
मुख्य बिंदु:
विधानसभा के 75 वर्ष पूरे होने पर अमृत महोत्सव का विशेष सत्र।
पूर्व व वर्तमान विधायकों ने ऐतिहासिक कानूनों पर रखे विचार।
संसदीय मर्यादा, अध्ययन और लोकतांत्रिक परंपराओं पर विशेष जोर।
शिक्षा, किसान, महिला सुरक्षा, गिग वर्कर्स और सामाजिक सुधार से जुड़े कानूनों पर चर्चा।
जनहित और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत बनाने का संदेश।