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पेपर लीक का ‘किंगपिन’ सुरेश ढाका: 4 साल से पुलिस को दे रहा गच्चा, अब पिता के नाम 20 करोड़ की लीज ने उड़ाए होश!

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जालोर-सांचौर का वो ‘सोशल मीडिया मैनेजर’ जो बना महा-ठग; सुरेश ढाका की बेतहाशा संपत्ति पर अब SOG और ED का शिकंजा।

​पेपर लीक का मास्टरमाइंड सुरेश ढाका 4 साल से फरार, पिता के नाम 20 करोड़ की बजरी लीज मिलने से SOG और ED सतर्क; संपत्ति कुर्की के बाद भी पुलिस के हाथ खाली

​जालोर/सांचौर, 14 जुलाई: राजस्थान के बहुचर्चित सेकेंड ग्रेड शिक्षक भर्ती पेपर लीक मामले का मुख्य आरोपी और मास्टरमाइंड सुरेश ढाका पिछले चार साल से पुलिस की गिरफ्त से दूर है। पुलिस भले ही उसे आज तक सलाखों के पीछे न भेज पाई हो, लेकिन उसकी और उसके परिवार की बेतहाशा संपत्ति लगातार नए खुलासे कर रही है। ताजा मामला ढाका के पिता और पूर्व सरपंच मांगीलाल के नाम ब्यावर में जारी हुई 20 करोड़ रुपये की बजरी खनन लीज का है। इस नए खुलासे के बाद स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) अब इस पूरे मामले के वित्तीय लेनदेन और मनी लॉन्ड्रिंग के कोण से जांच में जुट गई है।

​क्या है नया विवाद?

पूर्व में भी यह बात सामने आई थी कि सुरेश ढाका पेपर लीक और अवैध तरीकों से कमाए काले धन को अपने परिजनों के नाम पर निवेश करता था। अब ब्यावर में पिता के नाम 20 करोड़ की भारी-भरकम लीज मिलने से इस आशंका को बल मिला है कि फरार रहने के बावजूद ढाका का सिंडिकेट लगातार सक्रिय है और पैसों की हेराफेरी जारी है।

​अदालत के आदेश पर पहले ही हो चुकी है करोड़ों की पैतृक संपत्ति कुर्क

​सुरेश ढाका के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसते हुए उदयपुर की अपर जिला एवं सेशन कोर्ट (संख्या-1) के आदेश पर प्रशासन ने पहले ही बड़ी कार्रवाई की थी। सांचौर के पूर्व जिला कलेक्टर शक्ति सिंह राठौड़ के निर्देशन में राजस्व विभाग की टीम ने ढाका के पैतृक गांव अचलपुर (गंगासर) में स्थित 3.15 हेक्टेयर कृषि भूमि को कुर्क कर लिया था। इस जमीन का रिसीवर स्थानीय तहसीलदार को बनाया गया था। पेपर लीक मामले में प्रॉपर्टी जब्ती की यह राजस्थान की पहली बड़ी कार्रवाइयों में से एक थी।

​मुंबई के मनी लॉन्ड्रिंग से लेकर नेताओं के सोशल मीडिया मैनेजमेंट तक का सफर

​सुरेश ढाका का अपराध जगत और रसूखदारों से कनेक्शन बेहद पुराना और गहरा है:

​महाराष्ट्र कनेक्शन: ढाका ने अपने शुरुआती काले कारनामे महाराष्ट्र से शुरू किए थे, जहाँ उस पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज हुआ था।

​नेताओं का करीबी: मुंबई से भागकर वह जयपुर आया और यहाँ उसने बड़े नेताओं की सोशल मीडिया पीआर और ब्रांडिंग का काम संभाल लिया। इसी रसूख की आड़ में उसने पेपर लीक गिरोह के नेटवर्क में कदम रखा।

​अपराधिक रिकॉर्ड: ढाका मामूली अपराधी नहीं है। वह पूर्व में दो बार जेल जा चुका है (एक बार मनी लॉन्ड्रिंग और एक बार पेपर लीक में) और वर्तमान में उसके खिलाफ 10 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं।

​ED की रडार पर जयपुर के आलीशान फ्लैट्स और फैक्ट्रियां

​केवल राज्य पुलिस ही नहीं, बल्कि केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी सुरेश ढाका पर शिकंजा कस चुकी है। ED ने ढाका की जयपुर स्थित कई बेनामी और मुख्य संपत्तियों को पहले ही सील कर दिया था, जिनमें शामिल हैं:

​🟢 वैशाली नगर स्थित बेहद महंगा और पॉश फ्लैट।

​🟢 बगरू औद्योगिक क्षेत्र में स्थित फैक्ट्री।

​🟢 हीरापुरा पावर हाउस के पास स्थित आलीशान मकान।

​सिस्टम पर उठते गंभीर सवाल

​इस पूरे मामले में सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यह उठता है कि 10 से ज्यादा गंभीर मुकदमों का आरोपी, जिसके पीछे ED, SOG और राजस्थान पुलिस पड़ी है, वह पिछले 4 साल से कैसे गायब है?

​एक तरफ पुलिस उसे ढूंढने में नाकाम रही है, तो दूसरी तरफ उसके परिवार के पास लगातार करोड़ों रुपये की नई संपत्तियां और लीज ट्रांसफर हो रही हैं। क्या सुरेश ढाका को किसी बड़े राजनीतिक रसूख या प्रशासनिक तंत्र का संरक्षण प्राप्त है? SOG की वित्तीय जांच के बाद इस मामले में कई और चौंकाने वाले खुलासे होने की उम्मीद है।

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