जयपुर/जोधपुर | 11 अगस्त 2026 राजस्थान में नदी तंत्र और पर्यावरण संरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जोजरी-बांडी-लूनी नदी तंत्र से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार को सात दिन के भीतर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एकीकृत समन्वय समूह गठित करने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राजस्थान की नदी प्रणालियों की वैज्ञानिक तरीके से हाई फ्लड लाइन और पारिस्थितिकीय बफर जोन तय किए जाने तक चिन्हित नदी कॉरिडोर में नए औद्योगिक, व्यावसायिक और आवासीय विकास पर रोक रहेगी।
नदी प्रदूषण और पर्यावरणीय नुकसान पर चिंता
सुप्रीम कोर्ट ने नदी तंत्र के लगातार क्षरण, जल स्रोतों में प्रदूषण, औद्योगिक अपशिष्ट के संभावित अनियंत्रित निस्तारण और वन्यजीव आवासों पर पड़ रहे प्रभाव को गंभीर विषय माना। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों से निपटने के लिए अलग-अलग विभागों की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रभावी समन्वय और जवाबदेही जरूरी है।
SIT की जांच को लेकर भी कोर्ट सख्त
सुनवाई के दौरान विशेष जांच दल यानी SIT की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए। कोर्ट ने निर्देश दिया कि जांच को केवल औद्योगिक प्रदूषण तक सीमित नहीं रखा जाए। मामले में उद्योगों के साथ निजी व्यक्तियों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की जाए।
स्वतंत्र रिवर अथॉरिटी बनाने पर जोर
कोर्ट ने राजस्थान रिवर बेसिन एंड वाटर रिसोर्सेज प्लानिंग अथॉरिटी की कार्यप्रणाली पर भी चिंता जताई। इसके स्थान पर पर्याप्त अधिकारों वाली स्वतंत्र रिवर कमीशन या रिवर रिजुवनेशन अथॉरिटी गठित करने के निर्देश दिए गए हैं।
नई व्यवस्था के तहत राज्य की नदियों, नदी बेसिन और कैचमेंट क्षेत्रों के संरक्षण, पुनर्जीवन तथा वैज्ञानिक प्रबंधन पर काम किया जाएगा।
कांकाणी RIICO क्षेत्र भी निगरानी में
सुप्रीम कोर्ट ने जोधपुर के कांकाणी RIICO औद्योगिक क्षेत्र को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए। कोर्ट के समक्ष यह मुद्दा आया कि औद्योगिक क्षेत्र का कुछ हिस्सा संभावित हाई फ्लड क्षेत्र में हो सकता है। वैज्ञानिक सर्वे में यदि ऐसा पाया जाता है कि क्षेत्र हाई फ्लड लाइन या पर्यावरणीय बफर जोन को प्रभावित कर रहा है, तो ले-आउट में बदलाव, भूखंडों के स्थानांतरण या अन्य सुधारात्मक कदम उठाने होंगे।
व्हाइट कैटेगरी उद्योगों के लंबित मामलों पर भी फैसला
कोर्ट ने व्हाइट कैटेगरी उद्योगों से जुड़े लंबित अभ्यावेदनों पर सात दिन के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। साथ ही पर्यावरणीय उल्लंघनों की शिकायतों के लिए QR कोड आधारित डिजिटल व्यवस्था विकसित करने को कहा गया है।
RSPCB और RIICO समेत सभी एजेंसियों को समन्वय के निर्देश
राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल, RIICO और अन्य संबंधित विभागों को समन्वय समूह एवं SIT के साथ पूरा सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य सचिव को पूरे मामले की निगरानी और विभिन्न विभागों के बीच प्रभावी तालमेल सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश
– 7 दिन में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समन्वय समूह का गठन।
– नदी प्रणालियों की वैज्ञानिक हाई फ्लड लाइन और बफर जोन तय करना।
– चिन्हित नदी कॉरिडोर में नए विकास पर अंतरिम रोक।
– स्वतंत्र रिवर कमीशन/रिवर रिजुवनेशन अथॉरिटी की दिशा में कदम।
– SIT जांच का दायरा उद्योगों के साथ निजी व्यक्तियों और अधिकारियों तक बढ़ाना।
– व्हाइट कैटेगरी उद्योगों के लंबित मामलों पर 7 दिन में निर्णय।
– पर्यावरणीय शिकायतों के लिए QR कोड आधारित डिजिटल सिस्टम।
– RSPCB, RIICO और अन्य विभागों के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करना।
नदी संरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के इन निर्देशों से राजस्थान में नदी कॉरिडोर, औद्योगिक गतिविधियों और पर्यावरणीय प्रबंधन की व्यवस्था पर व्यापक असर पड़ने की संभावना है।