3800 बीघा जमीन के आवंटन पर ग्रामीणों का बड़ा विरोध, कैलाशनगर में गूंजा आंदोलन का ऐलान

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निजी सोलर कंपनी को जमीन देने की प्रक्रिया के खिलाफ विशाल धरना-प्रदर्शन | पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने सरकार पर साधा निशाना | मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर आवंटन रद्द करने की मांग

शिवगंज। ( रिपोर्टर, महेंद्र सिंह परिहार )  मनादर-1 और मनादर-2 क्षेत्र की करीब 3800 बीघा राजकीय एवं राजस्व भूमि निजी सोलर कंपनी को आवंटित किए जाने की प्रस्तावित प्रक्रिया को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। मंगलवार को कैलाशनगर में बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हुए और भूमि आवंटन के विरोध में धरना-प्रदर्शन किया।

धरना स्थल पर पहुंचे पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने ग्रामीणों के समर्थन में आवाज उठाते हुए राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ग्रामीणों के हितों की अपेक्षा निजी कंपनियों के हितों को प्राथमिकता दे रही है।

भूमि आवंटन को लेकर उठे सवाल

धरने को संबोधित करते हुए संयम लोढ़ा ने कहा कि मनादर क्षेत्र में बड़ी मात्रा में सरकारी एवं राजस्व भूमि एक निजी कंपनी को देने की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने बताया कि 400 मेगावाट की सोलर परियोजना के लिए 23 मार्च 2026 को आवेदन किए जाने के बाद विभागीय स्तर पर तेजी से कार्रवाई और अनुशंसाएं की गईं, जिस पर ग्रामीणों के बीच सवाल उठ रहे हैं।

लोढ़ा ने कहा कि हजारों बीघा भूमि का मामला केवल जमीन के आवंटन तक सीमित नहीं है। इस क्षेत्र से स्थानीय ग्रामीणों की पारंपरिक गतिविधियां और पशुपालन जैसी आवश्यकताएं जुड़ी हुई हैं। ऐसे में भूमि के निजी उपयोग के लिए चले जाने से ग्रामीणों की भविष्य की जरूरतों पर असर पड़ने की आशंका है।

‘विकास के नाम पर ग्रामीणों के अधिकार प्रभावित नहीं होने देंगे’

पूर्व विधायक ने कहा कि विकास परियोजनाओं का विरोध विकास के खिलाफ नहीं है, लेकिन किसी भी परियोजना को आगे बढ़ाते समय स्थानीय लोगों के हितों और उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की जमीन और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े अधिकारों पर कोई भी फैसला लेने से पहले स्थानीय स्तर पर उनकी बात सुनी जानी चाहिए।

आंदोलन को जिला स्तर तक ले जाने की चेतावनी

धरने के दौरान सरकार को चेतावनी देते हुए लोढ़ा ने कहा कि यदि भूमि आवंटन की प्रक्रिया को वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर जिला स्तर पर बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा और ग्रामीणों के अधिकारों के लिए प्रशासनिक एवं लोकतांत्रिक स्तर पर संघर्ष जारी रहेगा।

मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

धरना-प्रदर्शन के बाद ग्रामीणों ने उप-तहसीलदार कैलाशनगर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मनादर-1 एवं मनादर-2 क्षेत्र की प्रस्तावित भूमि आवंटन प्रक्रिया को तत्काल रोकने/निरस्त करने तथा ग्रामीण एवं सार्वजनिक हितों की रक्षा करने की मांग की गई।

ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित भूमि का उपयोग लंबे समय से स्थानीय स्तर पर सामुदायिक और पशुपालन संबंधी जरूरतों के लिए किया जाता रहा है। इसलिए इतनी बड़ी भूमि निजी कंपनी को दिए जाने से क्षेत्र के ग्रामीणों के हित प्रभावित हो सकते हैं।

धरने में बड़ी संख्या में ग्रामीण रहे मौजूद

कैलाशनगर में आयोजित प्रदर्शन में मनादर सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे। मौके पर राजेंद्र रावल, कैलाशनगर सरपंच तेजाराम, गंगासिंह, पूर्व प्रधान अचलाराम, प्रवीण रावल, हरीश राठौड़, प्रागाराम देवासी, लकमाराम सुथार, तोलाराम देवासी, सवाराम देवासी, सरदारमल पुरोहित, माधोसिंह राजपूत, जेठाराम चौधरी, विसाराम रावल, भंवर घांची, शांतिलाल लोहार, नारायण सुथार, रावणा शैतानसिंह, रतन माली, पुनित दिनेश पटेल, ईश्वर सिंह, रविंद्र रावल सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे।

भूमि आवंटन के विरोध में ग्रामीणों की बढ़ती लामबंदी को देखते हुए आने वाले दिनों में आंदोलन के और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

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