आबूरोड: ‘धन से ज्यादा जरूरी उसका सदुपयोग’, परमात्म स्मृति से सही निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है: बीके मुन्नी दीदी

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परमात्म स्मृति से मिलती है सही निर्णय लेने की शक्ति, धन प्रबंधन में नैतिकता जरूरी

आबूरोड। ब्रह्माकुमारीज़ के फाइनेंस फ्रेटरनिटी सेवा विंग की ओर से मान सरोवर परिसर स्थित दिव्य शक्ति अनुभूति हॉल में पांच दिवसीय चौथे माइंड-मनी-मैनेजमेंट राष्ट्रीय सेवा सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। सम्मेलन में देशभर से फाइनेंस, अकाउंट एवं टैक्सेशन क्षेत्र से जुड़े अधिकारी-कर्मचारी, प्रोफेशनल्स, सीए और सीएस भाग ले रहे हैं।

शुभारंभ अवसर पर अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी बीके मुन्नी दीदी ने कहा कि धन का प्रभावी प्रबंधन तभी संभव है, जब मन शांत, स्थिर और सकारात्मक हो। परमात्म स्मृति व्यक्ति को आंतरिक शक्ति के साथ सही निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करती है। धन जीवन की आवश्यकता है, लेकिन उससे भी महत्वपूर्ण उसका सदुपयोग और उसके पीछे की भावना है।

द इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया के अध्यक्ष सीएमए चित्तरंजन चट्टोपाध्याय ने कहा कि वित्तीय क्षेत्र में जिम्मेदारी और विश्वास सबसे महत्वपूर्ण हैं। वित्त प्रबंधन केवल आंकड़ों और संसाधनों तक सीमित नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति दायित्व से भी जुड़ा है। उन्होंने वित्तीय निर्णयों में ईमानदारी, पारदर्शिता और नैतिकता को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।

समय, विचार और ऊर्जा का प्रबंधन भी जरूरी

अंतरराष्ट्रीय मोटिवेशनल स्पीकर डॉ. जितेंद्र आधिया ने कहा कि वास्तविक सफलता केवल धन और उपलब्धियों से तय नहीं होती। मन की प्रसन्नता, संतुलित सोच और सकारात्मक दृष्टिकोण जीवन की बड़ी पूंजी हैं। जिस प्रकार धन का बजट बनाया जाता है, उसी प्रकार समय, विचार और ऊर्जा का भी बेहतर प्रबंधन आवश्यक है।

महासचिव राजयोगी बीके करुणा भाई ने कहा कि सेवा की वास्तविक शक्ति श्रेष्ठ भावना और परमात्म शक्ति में निहित है। शुभ संकल्पों का प्रभाव व्यक्ति के निर्णय, व्यवहार और कार्यों में दिखाई देता है। वित्त क्षेत्र से जुड़े लोगों की जिम्मेदारी और अधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनके निर्णय समाज के अनेक लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं।

अतिरिक्त महासचिव राजयोगी बीके डॉ. मृत्युंजय भाई ने कहा कि बाहरी परिस्थितियों को नियंत्रित करने से पहले मन को नियंत्रित करना आवश्यक है। मन शांत रहने पर कठिन परिस्थितियों में भी सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है।

धन साधन है, जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं

ग्लोबल हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. प्रताप मिड्ढा ने कहा कि धन जीवन को सुगम बनाने का साधन है, इसे जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं बनाया जाना चाहिए। धन का उपयोग परिवार, समाज और राष्ट्र के कल्याण में किया जाए तो वह सेवा का माध्यम बन सकता है।

कार्यक्रम में बीके सीए ललित इनानी ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया और सम्मेलन के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर ‘कर्म से पुण्य कमा ले प्राणी’ गीत का विमोचन भी किया गया। मधुर वाणी ग्रुप ने स्वागत गीत एवं स्वागत नृत्य प्रस्तुत किया। बीके सीए कृष्ण भाई ने आभार व्यक्त किया, जबकि कार्यक्रम का संचालन फाइनेंस फ्रेटरनिटी सेवा विंग की राष्ट्रीय समन्वयक बीके इशिता बहन ने किया।

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