प्रशासनिक शह पर पनप रहा मौत का कारोबार: सिरोही जिले में बेखौफ अवैध क्लिनिक और झोलाछाप, मासूमों की जिंदगी से खिलवाड़ पर ब्लॉक अधिकारी क्यों मौन?

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सिरोहीराजस्थान के सिरोही जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था की धज्जियां उड़ाता एक बड़ा और संगीन खेल उजागर हो रहा है। जिले में बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित हो रहे अवैध अस्पताल और जगह-जगह कुकुरमुत्ते की तरह खुले झोलाछाप क्लिनिक निर्दोश और गरीब जनता की जिंदगी के साथ सीधा खिलवाड़ कर रहे हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि इस पूरे अवैध धंधे पर नकेल कसने के बजाय स्थानीय प्रशासनिक तंत्र और स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार मूकदर्शक बने हुए हैं, जिससे अधिकारियों की सांठगांठ की बू साफ तौर पर आ रही है।

पत्रकारों और मीडिया को बदनाम करने का कुत्सित प्रयास

जब-जब निष्पक्ष मीडिया और निर्भीक पत्रकारों ने इस अवैध नेटवर्क, प्रशासनिक लापरवाही और ‘ऊपरी कमाई’ के खेल की पर्दाफाश करती रिपोर्ट पेश की, तब-तब कार्रवाई करने के बजाय सिस्टम अपनी नाकामियों को छुपाने में जुट गया। आलम यह है कि अपनी कमियां छुपाने के लिए प्रशासन और झोलाछाप गिरोह मिलकर सच उजागर करने वाले मीडियाकर्मियों को ही निशाना बनाने और उन्हें बदनाम करने की साजिशें रच रहे हैं।

बड़ा सवाल: क्या कार्रवाई करने की जिम्मेदारी निभाने के बजाय जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का एकमात्र काम मीडियाकर्मियों की कमियां तलाशना रह गया है?

सालों से बेखौफ चल रहे क्लिनिक: ब्लॉक अधिकारियों की चुप्पी पर उठे सवाल

जिले के कई ब्लॉक क्षेत्रों में यह अवैध झोलाछाप क्लिनिक पिछले कई सालों से बेधड़क संचालित हो रहे हैं। कानूनन जिन ब्लॉक स्तरीय स्वास्थ्य अधिकारियों (BCHO / BCMO) का पहला कर्तव्य अपने क्षेत्र में अवैध चिकित्सा गतिविधियों की जांच करना, छापेमारी करना और एफआईआर दर्ज कराना है, वे आंखें मूंदे बैठे हैं।

कर्तव्य से भटकाव: क्षेत्र में कौन सा क्लिनिक वैध है और कौन सा अवैध, इसकी नियमित निगरानी ब्लॉक अधिकारियों का मूलभूत कार्य है।

भ्रष्टाचार का आरोप: स्थानीय ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों का सीधा आरोप है कि विभागीय अधिकारी महीनेदारी और ‘ऊपरी कमाई’ के मोह में इतने लिप्त हो चुके हैं कि उन्हें जनता की जान की कोई परवाह नहीं है।

मासूम बच्चों के भविष्य और सेहत से खिलवाड़

झोलाछाप डॉक्टरों के पास न तो कोई वैध मेडिकल डिग्री है और न ही एलोपैथिक दवाइयां देने का अधिकार। इसके बावजूद, तुरंत आराम दिखाने और मोटी रकम वसूलने के चक्कर में ये फर्जी डॉक्टर मासूम और गरीब बच्चों को हैवी डोज (Heavy Dosage) और हायर एंटीबायोटिक्स (Higher Antibiotics) धड़ल्ले से दे रहे हैं।

गंभीर खतरा: बिना मानक जांच के दी जा रही ये हैवी एंटीबायोटिक्स दवाइयां बच्चों के लिवर, किडनी और इम्यून सिस्टम को स्थायी रूप से नुकसान पहुंचा रही हैं।

सहानुभूति का अभाव: पैसों की अंधी दौड़ में इन मासूमों के स्वास्थ्य और जीवन को दांव पर लगा दिया गया है।

आखिर किसकी मेहरबानी? कब होगा ठोस संज्ञान?

यह बेहद गंभीर विषय है कि इतने बड़े पैमाने पर मानव जीवन से खिलवाड़ होने के बावजूद जिला प्रशासन और उच्चाधिकारी केवल औपचारिक आश्वसनों तक सीमित हैं।

तत्काल सीलिंग व FIR: जिले में संचालित हर बिना रजिस्ट्रेशन वाले अस्पताल और क्लिनिक को तुरंत सील कर संचालकों पर गैर-जमानती धाराओं में मामला दर्ज किया जाए।

लापरवाह अधिकारियों पर गाज: वर्षों से अपनी सीमा में अवैध क्लिनिक चलने देने वाले जिम्मेदार ब्लॉक अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच बैठाकर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई हो।

मीडिया को संरक्षण: भ्रष्टाचार उजागर करने वाले पत्रकारों को निशाना बनाने की कोशिशों पर विराम लगे और प्रशासन पारदर्शिता से काम करे।

अब देखना यह होगा कि सिरोही जिला प्रशासन और राज्य का स्वास्थ्य विभाग इस जानलेवा तंत्र पर कब सख्त कदम उठाता है या फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार करता रहेगा।

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