भविष्य के ‘स्वास्थ्य रक्षकों’ का भविष्य अंधकार में: राजकीय नर्सिंग कॉलेज सिरोही में बुनियादी सुविधाओं का अकाल

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अव्यवस्थाओं के फेर में फंसा सिरोही का राजकीय नर्सिंग कॉलेज; न पीने को साफ पानी, न समय पर कक्षाएं—गुहार लगा रहे आक्रोशित छात्र

सिरोही | एक ओर जहां राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने और बेहतर चिकित्सा शिक्षा प्रदान करने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर राजकीय नर्सिंग महाविद्यालय, सिरोही की हकीकत इन दावों की पोल खोलती नज़र आ रही है। भावी स्वास्थ्य रक्षकों (छात्र-छात्राओं) का आरोप है कि कॉलेज प्रशासन की घोर अनदेखी और लापरवाही के कारण उनका शैक्षणिक भविष्य और स्वास्थ्य दोनों दांव पर लगे हैं।

विद्यार्थियों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कॉलेज परिसर की दयनीय स्थिति का खुलासा किया है। लंबे समय से बनी इन मूलभूत समस्याओं के कारण छात्र-छात्राओं में भारी असंतोष व्याप्त है।

समस्याओं के ‘जाल’ में उलझा महाविद्यालय:

समय-सारिणी केवल कागज़ों पर: कॉलेज में टाइम-टेबल के अनुसार नियमित कक्षाएं नहीं लग रही हैं, जिससे पाठ्यक्रम समय पर पूरा होने को लेकर छात्र चिंतित हैं।

 स्वच्छता और स्वास्थ्य से खिलवाड़: कक्षाओं और वॉशरूम की नियमित साफ-सफाई न होने के कारण संक्रमण का खतरा मंडरा रहा है। पर्याप्त डस्टबिन तक उपलब्ध नहीं हैं।

 पीने के साफ पानी का संकट: विद्यार्थियों के लिए स्वच्छ और पर्याप्त पेयजल की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है।

बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर ध्वस्त: कक्षाओं में न तो विद्यार्थियों के बैठने की समुचित व्यवस्था (फर्नीचर) है और न ही ब्लैकबोर्ड सही हालत में हैं।

लाइब्रेरी और एक्टिविटी कॉर्नर का अभाव: अध्ययन के अनुकूल वातावरण का पूरी तरह अभाव है। न तो संदर्भ पुस्तकों के लिए लाइब्रेरी है और न ही बौद्धिक विकास के लिए थिंकिंग/स्टूडेंट एक्टिविटी कॉर्नर।

खेलकूद से दूरी: सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक खेल गतिविधियों (Sports Week) का आयोजन वर्षों से नहीं किया जा रहा है।

“पढ़ाई का माहौल नहीं, मानसिक तनाव झेल रहे छात्र”

विद्यार्थियों का कहना है कि वे यहाँ नर्सिंग जैसी गंभीर और जिम्मेदार पढ़ाई करने आते हैं, लेकिन कॉलेज का माहौल अध्ययन के बिल्कुल भी अनुकूल नहीं है। बुनियादी सुविधाओं के अभाव में उन्हें हर दिन संघर्ष करना पड़ता है।

छात्रों की चेतावनी:

“यदि कॉलेज प्रशासन और संबंधित विभाग ने जल्द ही हमारी जायज मांगों पर ध्यान देकर व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया, तो छात्र-छात्राएं उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।”

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