फर्जी विज्ञापनों का जाल: सोशल मीडिया पर ‘बेहतर और सस्ते इलाज’ के लुभावने वादों से ग्रामीण व गरीब जनता को बनाया जा रहा निशाना।
डिग्री एक, ठिकाने अनेक: डॉक्टरों के केबिनों में टंगी MBBS डिग्रियों के नाम पर फर्जीवाड़ा; एक ही डॉक्टर कई अस्पतालों में नामांकित, मौके पर अप्रशिक्षित स्टाफ।
स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी: मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को बार-बार शिकायत के बावजूद कोई ठोस प्रशासनिक कार्रवाई नहीं।
जन-आक्रोश चरम पर: लगातार बढ़ती लापरवाही और मौतों के खतरों के बीच स्थानीय निवासियों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी।
सिरोही| राजस्थान के सिरोही जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर अवैध क्लीनिकों और बिना रजिस्ट्रेशन वाले अस्पतालों का जाल तेजी से फैल रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बेझिझक किए जा रहे बड़े-बड़े दावों और झूठे विज्ञापनों के जरिए भोले-भाले, गरीब और अशिक्षित मरीजों को गुमराह किया जा रहा है। सबसे गंभीर सवाल यह उठ रहा है कि इन जानलेवा गतिविधियों पर जिला प्रशासन और चिकित्सा विभाग ने पूरी तरह से आंखें क्यों मूंद रखी हैं?
1. सोशल मीडिया पर धड़ल्ले से प्रचार और फर्जी दावे
जिले भर में कई ऐसे निजी संस्थान और तथाकथित क्लीनिक संचालित हो रहे हैं, जिनके पास न तो कोई वैध रजिस्ट्रेशन है और न ही मानक चिकित्सा सुविधाएं। इसके बावजूद ये संस्थान फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म्स पर आधुनिक इलाज का दावा करते हुए खुलेआम विज्ञापन चला रहे हैं।
बड़ा सवाल: जब आम नियम-कायदों के तहत किसी भी मेडिकल विज्ञापन के लिए सख्त दिशानिर्देश हैं, तब बिना रजिस्ट्रेशन वाले संस्थान खुल्लम-खुल्ला प्रचार कैसे कर पा रहे हैं?

2. MBBS की डिग्री दीवार पर, इलाज कर रहे अप्रशिक्षित हाथ
अस्पतालों और क्लीनिकों के अंदर का नजारा और भी चौंकाने वाला है।
डिग्रियों का दिखावा: डॉक्टरों के केबिन की दीवारों पर MBBS और विशेषज्ञ डिग्रियों के फ्रेम लटके नजर आते हैं।
सच्चाई: जिन डॉक्टरों के नाम की पट्टिकाएं लगी हैं, वे एक ही समय में जिले के दो से चार अलग-अलग अस्पतालों में अपनी “सेवाएं” दर्ज करा चुके हैं।
मरीजों की जान से खिलवाड़: वास्तव में डॉक्टर मौके पर मौजूद ही नहीं होते। उनकी अनुपस्थिति में अप्रशिक्षित कम्पाउंडर, झोलाछाप और बिना किसी मेडिकल बैकग्राउंड वाले लोग मरीजों का गंभीर इलाज व दवाइयां लिख रहे हैं।
3. शिकायतों के बावजूद CMHO और प्रशासन मौन
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि सिरोही मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) और जिला प्रशासन को इस फर्जीवाड़े की लिखित और मौखिक शिकायतें बार-बार दी जा चुकी हैं।
इसके बावजूद:
🔹न तो किसी अवैध क्लीनिक को सील किया गया,
🔹 न ही डिग्रियों का फर्जी इस्तेमाल करने वाले अस्पतालों पर कोई FIR दर्ज हुई,
🔹 और न ही सोशल मीडिया पर चल रहे अवैध विज्ञापनों पर कोई रोक लगाई गई।
प्रशासन की इस रहस्यमयी चुप्पी से झोलाछाप और नियम तोड़ने वाले अस्पताल संचालकों के हौसले बुलंद हैं।
4. जनता का सब्र टूटा, बड़े आंदोलन की दी चेतावनी
अस्पतालों की लगातार सामने आ रही लापरवाहियों और प्रशासनिक अनदेखी से तंग आकर अब जिले की जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। विरोध प्रदर्शन कर रहे स्थानीय प्रतिनिधियों और ग्रामीणों का कहना है कि अब कागजी शिकायतों का दौर खत्म हो चुका है।
यदि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत प्रभाव से इन अवैध संस्थानों पर छापेमारी, सीलिंग और कड़े कानूनी कदम नहीं उठाए, तो पूरे जिले में एक व्यापक और उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
प्रशासनिक स्तर पर तुरंत आवश्यक कदम:
| 1.| विशेष कार्य बल (Task Force) का गठन | जिले के सभी निजी अस्पतालों और क्लीनिकों की आकस्मिक जांच। |
| 2. | डिग्रियों का सत्यापन (Audit) | ऑन-ड्यूटी डॉक्टर की भौतिक उपस्थिति और बायोमेट्रिक जांच mandatory करना। |
| 3. | अवैध विज्ञापनों पर रोक | बिना रजिस्ट्रेशन सोशल मीडिया पर विज्ञापन देने वाले संस्थानों पर IT एक्ट व मेडिकल एक्ट के तहत मामला दर्ज। |
| 4. | क्लीनिकों की सीलिंग | बिना मानक व रजिस्ट्रेशन चल रहे क्लीनिकों को तुरंत प्रभाव से सील करना। |