Headlines

आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत, गंभीर स्वास्थ्य संकट पर ही जमानत पर होगा विचार

Spread the love

आसाराम को फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, गंभीर स्वास्थ्य स्थिति होने पर ही जमानत पर विचार

नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम को फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। शीर्ष अदालत ने उनकी जमानत याचिका पर तत्काल राहत देने से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि केवल ऐसी स्थिति में जमानत पर विचार किया जाएगा, जब उनकी स्वास्थ्य स्थिति अत्यंत गंभीर हो या जीवन को वास्तविक खतरा उत्पन्न हो।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने राजस्थान सरकार को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए। अदालत ने फिलहाल सजा पर रोक लगाने से भी इनकार किया और कहा कि राज्य सरकार का पक्ष सुनने के बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा।

उम्र और बीमारी को नहीं माना पर्याप्त आधार

आसाराम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि उनकी उम्र 80 वर्ष से अधिक है और वे कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। इस पर अदालत ने कहा कि केवल अधिक उम्र या सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं के आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती। हालांकि, यदि भविष्य में उनकी स्थिति जीवन के लिए गंभीर खतरा बनती है तो अदालत इस पहलू पर विचार कर सकती है।

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने जेल प्रशासन को निर्देश दिया कि आसाराम को आवश्यक और उचित चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

हाईकोर्ट पहले ही बरकरार रख चुका है उम्रकैद

इससे पहले राजस्थान हाईकोर्ट ने 27 मई को ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए आसाराम की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी थी। हालांकि, अदालत ने उन्हें सामूहिक दुष्कर्म और कुछ अन्य गंभीर धाराओं से राहत दी थी, लेकिन नाबालिग से दुष्कर्म से संबंधित अपराध में दोषसिद्धि को कायम रखा।

कई अन्य धाराओं में भी दोषी

हाईकोर्ट ने आसाराम को नाबालिग पीड़िता से जुड़े यौन अपराधों के अलावा अवैध रूप से बंधक बनाने, आपराधिक धमकी, महिला की मर्यादा भंग करने और यौन उत्पीड़न से संबंधित विभिन्न धाराओं में भी दोषी माना है। पॉक्सो अधिनियम और किशोर न्याय अधिनियम की कुछ धाराओं के तहत भी उनकी सजा बरकरार रखी गई है।

2013 का है मामला

यह मामला वर्ष 2013 का है, जब आश्रम में पढ़ने वाली एक नाबालिग छात्रा ने आसाराम पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था। लंबी सुनवाई के बाद 25 अप्रैल 2018 को ट्रायल कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। राजस्थान हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद अब उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है, जहां फिलहाल उन्हें जमानत नहीं मिली है और मामले की अगली सुनवाई राज्य सरकार के जवाब के बाद होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *