सरकारी अस्पतालों के ICU में भ्रष्टाचार, हजारों के उपकरण लाखों में खरीदे, मंत्री बोले- मामला गंभीर

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जयपुर: प्रसूताओं की मौतों से चर्चा में आए राजस्थान के सरकारी अस्पतालों के आइसीयू अब भ्रष्टाचार के संक्रमण की बात सामने आई है। राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन (आरएमएससीएल) ने आइसीयू अपग्रेड करने के नाम 17 करोड़ रुपए की लागत से मल्टीपैरा मॉनिटरों की खरीद की है। आरोप है कि बाजार में 77 हजार में मिलने वाले इस मॉनिटर को 25 हजार रुपए अधिक में यानी एक लाख से ज्यादा में खरीदा गया है। खरीद में भ्रष्टाचार की लिखित शिकायत के बावजूद इन्हें आईसीयू तक पहुंचा दिया गया।

चौकाने बात यह है कि मॉनिटर सप्लाई करने वाली फर्म महाराष्ट्र, यूपी और गुजरात में ब्लैकलिस्टेड है। पड़ताल में यह भी सामने आया कि फर्म की ओर से प्रस्तुत किये गए सर्टिफिकेट की वैधता 26 मई 2024 को समाप्त हो चुकी थी। बाद में एक्सटेंडेड सर्टिफिकेट लगाया गया। यही नहीं स्वीकृति मॉनिटर के बजाय सप्लाई किए गए मॉनिटर में भी अंतर पाया गया है। एक ही मॉडल के तीन अलग-अलग आकार सामने आने से तकनीकी मंजूरी पर सवाल खड़े हो गए है। जबकि हार्डवेयर बदलने पर नया सीडीएससीओ अप्रूवल जरूरी होता है। पोर्टल, टेंडर कैटलॉग और अस्पतालों में सप्लाई किए गए मॉनिटर की तस्वीरों में अंतर पाया गया।

तकनीकी जांच में फेल, फिर भी मंजूरी:

सप्लाई किए गए मॉनिटर बायोमेडिकल इंजीनियर की जांच में 6 में से 5 अनिवार्य तकनीकी मानकों पर खरे नहीं उतरे। मशीनों में एक साथ 6 वेवफॉर्म डिस्प्ले नहीं मिले। ऑटो स्नैपशॉट फीचर गायब मिला और डाइमेंशन भी दस्तावेजों से मेल नहीं खाए। जबकि इन्हीं फीचर्स के आधार पर 25 हजार रुपए अतिरिक्त दर स्वीकृत की गई थी।

गलत रीडिंग से मरीज को खतरा:

विशेषज्ञों का कहना है कि आईसीयू में सब-स्टैंडर्ड मॉनिटर का इस्तेमाल सीधे मरीजों की जान जोखिम में डाल सकता है। बीपी, ऑक्सीजन सैचुरेशन और ईसीजी की गलत रीडिंग मिलने पर डॉक्टर गलत दवा, गलत इंजेक्शन या वेंटिलेटर की गलत सेटिंग दे सकते हैं, जिसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

अधूरे पार्ट्स की सप्लाई:

प्रत्येक यूनिट के साथ एक्सटेंशन केबल देना अनिवार्य था। फर्म ने 3 प्रोब तो दिए, लेकिन केबल एक ही भेजी। एक केबल की कीमत लगभग 5 हजार रुपए बताई जा रही है। ऐसे में 1500 यूनिट पर यह गड़बड़ी 75 लाख से 1.5 करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है।

गंभीर मामला, जांच करवाएंगे:

यह तो गंभीर मामला है। ब्लैक लिस्टेड फर्म से क्यों आपूर्ति ली गई? मानकों के विपरीत होने के बाद भी मॉनिटर क्यों लगा दिए गए? जानकारी लेता हूं।

गजेन्द्र सिंह खींवसर, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री

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