चूरू/सादुलपुर, 20 अगस्त। दस साल पहले परिवार से बिछड़ा मन्नू आखिरकार गुरुवार को अपने घर लौट आया। लंबे समय तक तलाश के बावजूद कोई सुराग नहीं मिलने पर परिजनों ने उसे मृत मान लिया था। लेकिन सादुलपुर स्थित विमला देवी सेवा आश्रम की पहल और पुलिस के सहयोग से परिवार को पता चला कि मन्नू जीवित है और आश्रम में सुरक्षित है।
आश्रम में मिला था मन्नू
आश्रम संचालक एवं समाजसेवी मनीष शर्मा के अनुसार करीब दो-तीन महीने पहले मन्नू शहर में घूमता मिला था। इसके बाद उसे आश्रम लाया गया। पहचान से जुड़ी जानकारी जुटाने के बाद देवरिया पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी गई। पुलिस ने रुद्रपुर थाना क्षेत्र के गांव हल्लादपुर मड़कड़ी के सरपंच से संपर्क किया, जिसके माध्यम से मन्नू के परिजनों की जानकारी सामने आई।
10 साल बाद चाचा को देखकर भावुक हुए भतीजे
गुरुवार शाम आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद मन्नू को उसके परिजनों के सुपुर्द किया गया। उसे लेने पहुंचे भतीजे आकाश और अंकित यादव ने जैसे ही अपने चाचा को सामने देखा, भावुक होकर गले लगा लिया। लंबे समय बाद हुए इस मिलन को देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।
परिवार ने छोड़ दी थी लौटने की उम्मीद
परिजनों के अनुसार मन्नू के लापता होने के बाद उन्होंने रिश्तेदारों, परिचितों और कई संभावित स्थानों पर उसकी तलाश की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। वर्षों तक इंतजार के बाद परिवार ने उसके जीवित होने की उम्मीद छोड़ दी थी। ऐसे में दस साल बाद उसके सकुशल मिलने की खबर परिवार के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं रही।
परिजनों ने मन्नू को सुरक्षित ढूंढकर परिवार तक पहुंचाने में सहयोग करने वाले आश्रम संचालक मनीष शर्मा और पुलिस का आभार जताया। दस साल बाद घर लौटे मन्नू की कहानी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उम्मीद कभी खत्म नहीं करनी चाहिए।