80 साल की आजादी, फिर भी घास-फूस के स्कूल में पढ़ रहे बच्चे! भाटी ने शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

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बाड़मेर | 15 अगस्त 2026 स्वतंत्रता दिवस के मौके पर शिव विधानसभा क्षेत्र के निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। वीडियो में सीमावर्ती क्षेत्र के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय की बदहाल स्थिति दिखाई गई है, जहां बच्चे बेहद सीमित और बुनियादी सुविधाओं के अभाव वाले माहौल में पढ़ते नजर आ रहे हैं।

भाटी राजकीय प्राथमिक विद्यालय थानाणी, ग्राम द्राभा, गड़रारोड पहुंचे थे। उन्होंने बच्चों के साथ स्वतंत्रता दिवस मनाया और विद्यालय की स्थिति का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया।

“आजादी के 80 साल बाद भी ऐसी तस्वीर क्यों?”

भाटी ने सवाल उठाया कि भारत-पाकिस्तान सीमा से करीब 15 से 20 किलोमीटर अंदर स्थित क्षेत्र में यदि बच्चों को पढ़ाई के लिए पर्याप्त भवन और बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं, तो विकास के दावों पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि सवाल केवल एक विद्यालय का नहीं, बल्कि उन तमाम सीमावर्ती क्षेत्रों का है जहां बच्चों के भविष्य के लिए बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है।

जयपुर-दिल्ली में बैठे लोगों से पूछा सवाल

विधायक ने सवाल किया कि क्या राजधानी में बैठे जिम्मेदार लोग अपने बच्चों को ऐसी परिस्थितियों वाले विद्यालय में पढ़ाना पसंद करेंगे। उन्होंने कहा कि देश ने विज्ञान, अंतरिक्ष और तकनीक के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं, लेकिन ग्रामीण और सीमावर्ती इलाकों में शिक्षा की बुनियादी जरूरतें पूरी होना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

‘राइजिंग राजस्थान’ और विकसित भारत का लक्ष्य भी उठाया

भाटी ने राजस्थान के ‘राइजिंग राजस्थान’ अभियान और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य का जिक्र करते हुए कहा कि विकास की वास्तविक तस्वीर तभी सामने आएगी, जब दूरदराज के गांवों में रहने वाले बच्चों को भी बेहतर शिक्षा और सुविधाएं मिलेंगी।

सोशल मीडिया पर शुरू हुई नई बहस

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई यूजर्स ने सीमावर्ती क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों की स्थिति पर सवाल उठाते हुए सरकार से कार्रवाई की मांग की है।

वहीं कुछ लोगों ने भाटी की भूमिका पर भी सवाल उठाए। एक यूजर ने टिप्पणी करते हुए कहा कि विधायक बनने के बाद यदि उन्होंने इस विद्यालय की स्थिति सुधारने के लिए पहल की होती और यहां कक्ष बनवाने में सहयोग किया होता, तो यह अधिक प्रभावी कदम होता।

अब सवाल दोनों तरफ—सरकार और जनप्रतिनिधि से

स्वतंत्रता दिवस पर सामने आया यह वीडियो केवल शिक्षा व्यवस्था पर सवाल नहीं उठाता, बल्कि सरकार, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी को लेकर भी चर्चा खड़ी करता है।

सीमावर्ती क्षेत्र के बच्चों को सुरक्षित और बेहतर भविष्य देने के लिए विद्यालय की स्थिति सुधारना अब स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने एक महत्वपूर्ण चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

बच्चों के हाथों में तिरंगा था, लेकिन सवाल उनके भविष्य का था—क्या आजादी के 80 साल बाद भी उन्हें बेहतर स्कूल के लिए इंतजार करना पड़ेगा?

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