पिता ने बेटी की पार्थिव देह थामी तो छलक पड़े आंसू, माता-पिता के साहसिक फैसले ने दिया तीन लोगों को नया जीवन
बाड़मेर/बालोतरा, 30 अगस्त 2026। बालोतरा की 9 वर्षीय अंजलि अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसके अंग तीन जरूरतमंद लोगों के जीवन में नई उम्मीद बन गए हैं। बेटी को खोने के गहरे सदमे के बावजूद माता-पिता अशोक दास और कंचन देवी ने अंगदान की सहमति देकर मानवता की मिसाल पेश की। अंजलि के अंगदान के बाद परिवार के दुख के बीच कई जिंदगियों को नई आस मिली है।
अंजलि 19 अगस्त को स्कूल से घर लौट रही थी। इसी दौरान सड़क पार करते समय तेज रफ्तार बोलेरो कैंपर की चपेट में आ गई। हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गई। परिजन उसे उपचार के लिए एम्स जोधपुर लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उसे बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किया। हालांकि हालत में सुधार नहीं होने पर 27 अगस्त को चिकित्सकों ने अंजलि को ब्रेन डेड घोषित कर दिया।
बेटी के अंगदान का लिया बड़ा फैसला
अंजलि के पिता अशोक दास रिफाइनरी में बस चालक हैं और मां कंचन देवी गृहिणी हैं। परिवार में शादी के करीब 15 वर्ष बाद बेटे सवाई का जन्म हुआ था। इसके बाद बेटी अंजलि के आने से परिवार की खुशियां और बढ़ गई थीं।
अंजलि के ब्रेन डेड होने के बाद चिकित्सकों ने परिजनों को अंगदान के महत्व के बारे में जानकारी दी। बेटी को हमेशा के लिए खोने के दर्द के बीच माता-पिता ने उसके अंगदान का निर्णय लिया। शनिवार को एम्स जोधपुर में अंगदान की प्रक्रिया पूरी की गई।
अंग आवंटन की निर्धारित नीति के तहत अंजलि की एक किडनी एम्स जोधपुर में प्रत्यारोपण के लिए रखी गई, जबकि दूसरी किडनी और लिवर को ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से एसएमएस अस्पताल जयपुर भेजा गया। इस तरह अंजलि के अंग तीन जरूरतमंद मरीजों के लिए जीवन की नई उम्मीद बने।
बेटी की देह थामते ही रो पड़े पिता
अंगदान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब अंजलि की पार्थिव देह परिवार को सौंपी गई, तो पिता अशोक दास भावुक हो उठे। बेटी की देह को थामते ही उनका दर्द आंसुओं के रूप में छलक पड़ा। परिजनों की आंखें भी नम हो गईं। अस्पताल स्टाफ ने भी अंजलि को श्रद्धांजलि अर्पित की।
बाद में अंजलि की पार्थिव देह पचपदरा पहुंची तो पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। जिस बच्ची को लोग रोज स्कूल जाते और खेलते देखते थे, उसकी अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। लोगों ने फूल बरसाकर मासूम अंजलि को अंतिम विदाई दी।
एम्स जोधपुर में तीसरा बाल कैडेवरिक अंगदान
अंजलि का अंगदान एम्स जोधपुर में होने वाला 12वां कैडेवरिक और तीसरा बाल कैडेवरिक अंगदान बताया गया है। इससे पहले जोधपुर की 16 वर्षीय कनिष्का गौड़ और बालोतरा के गिड़ा क्षेत्र के 5 वर्षीय भोमाराम के अंगदान भी किए जा चुके हैं।
अंजलि की कहानी एक परिवार के असहनीय दुख के साथ-साथ मानवता और त्याग की मिसाल भी बन गई है। जिस बेटी को उसके माता-पिता कभी वापस नहीं पा सकेंगे, उसके अंग अब दूसरे परिवारों में जीवन की उम्मीद जगाएंगे। अंजलि जिंदगी से विदा जरूर हुई, लेकिन अंगदान के जरिए वह कई जिंदगियों में हमेशा जीवित रहेगी।