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बाड़मेर: फर्जीवाड़ा, लापरवाही और बेफिक्री की सारी हदें पार करती आडेल की राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय की शर्मनाक तस्वीरें कल से सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।

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बाड़मेर: बाड़मेर जिले के आडेल जहां पढ़े-लिखे और जिम्मेदार लोग भी नादानी का परिचय देते हुए मासूम बच्चों के सामने आवारा तत्वों की तरह आपस में लड़ते दिखाई दे रहे हैं। हमारी कक्षा 12वीं में पढ़ने वाली बेटियां भी विरोध करती सुनाई दे रही हैं। सबके सामने गाली-गलौज, हाथों में पत्थर लेकर दोनों पक्षों द्वारा दादागिरी करते हुए जो दृश्य सामने आए, वे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं। पूरे मामले की वास्तविक जानकारी बहुत कम लोगों को है। असल में बोर्ड कक्षाओं के अलावा यदि विद्यालय सीनियर सेकेंडरी है, तो उसमें अध्ययनरत कक्षा 9वीं और कक्षा 11वीं के सभी विद्यार्थियों का प्रत्येक सत्र का परीक्षा परिणाम राज्य सरकार के शिक्षा विभाग के शाला दर्पण पोर्टल पर ऑनलाइन अपलोड किया जाता है। इसके बाद विद्यार्थियों की क्रमोन्नति होती है और वे अगली कक्षा में पहुंचते हैं। फिर बोर्ड परीक्षा के फॉर्म भरे जाते हैं। यदि कोई विद्यार्थी अन्य विद्यालय में टीसी लेकर प्रवेश लेना चाहता है, तो उसकी ऑनलाइन टीसी शाला दर्पण पोर्टल से जारी होती है तथा ऑनलाइन अंकतालिका भी उपलब्ध कराई जाती है। वर्तमान में केवल ऑनलाइन टीसी और ऑनलाइन अंकतालिका ही मान्य हैं। निजी शिक्षण संस्थानों के लिए RTE पोर्टल और सरकारी विद्यालयों के लिए शाला दर्पण पोर्टल आपस में जुड़े हुए हैं। अर्थात दोनों की जानकारी एकीकृत रहती है। किसी भी विद्यार्थी की टीसी का एक क्रमांक (टीसी नंबर) होता है। जैसे ही कोई विद्यार्थी राज्य के किसी भी जिले के सरकारी अथवा निजी विद्यालय में ऑनलाइन प्रवेश के दौरान वह टीसी नंबर दर्ज करता है, वैसे ही उसके पूर्व विद्यालय सहित विद्यार्थी की पूरी जानकारी पोर्टल पर दिखाई देती है।

लेकिन आडेल की राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के कक्षा 9वीं और कक्षा 11वीं के समस्त विद्यार्थी आज तक शाला दर्पण पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज नहीं हैं। न ही उनका परीक्षा परिणाम आज तक ऑनलाइन अपलोड किया गया है। यह सब शिक्षा विभाग की नाक के नीचे हो रहा है और अभिभावकों को ऑफलाइन, हाथ से लिखी तथा बाजार से खरीदे गए पन्नों पर टीसी प्रदान की जा रही है, जो नियमानुसार फर्जी मानी जाती है। अर्थात आडेल की राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के 9वीं और 11वीं के समस्त विद्यार्थी आज भी पोर्टल पर उसी कक्षा में दर्शाए जा रहे हैं, जबकि इस बार शिक्षा सत्र जल्दी शुरू होने के कारण प्रथम परख भी हो चुकी है। अब यह शिक्षा विभाग, विद्यालय के संस्था प्रधान, कार्यरत शिक्षक, विद्यार्थी और अभिभावक ही बताएंगे कि पहला टेस्ट आखिर किस कक्षा का दिया गया। क्योंकि नियमानुसार 9वीं के विद्यार्थी अब 10वीं में और 11वीं के विद्यार्थी 12वीं में होने चाहिए। लेकिन दुर्भाग्य से शाला दर्पण पोर्टल पर विद्यार्थी आज भी 9वीं और 11वीं में ही दर्शाए जा रहे हैं। असल में आडेल प्रकरण विद्यार्थियों और अभिभावकों के भविष्य के साथ कुठाराघात है। शिक्षा विभाग में इतने अधिकारी होने के बावजूद एक पूरी सरकारी स्कूल के विद्यार्थी ऑनलाइन दर्ज नहीं हैं और किसी को कानोंकान खबर तक नहीं। अथवा दाल में केवल काला ही नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली नजर आती है। कौन सही है और कौन गलत, इसकी निष्पक्ष जांच शिक्षा विभाग को करनी चाहिए। लेकिन मूंछ की लड़ाई में मासूम बच्चों का भविष्य खराब करने वालों के खिलाफ भविष्य में क्या कार्रवाई होती है, यह देखने वाली बात होगी। अथवा लीपापोती के बाद जब शिक्षा निदेशालय स्तर से पोर्टल पर विद्यार्थियों को ऑनलाइन दर्ज कर परीक्षा परिणाम जारी किया जाएगा और दोबारा टीसी उपलब्ध कराई जाएगी, तब भी सबूत के तौर पर पहले हाथ से काटी गई टीसी और अंकतालिकाएं हमेशा शिक्षा विभाग को शर्मसार करती रहेंगी। असल में अन्य विद्यालयों में विद्यार्थियों के प्रवेश नहीं होने तथा उनकी टीसी और अंकतालिका को फर्जी बताए जाने के बाद अभिभावकों और विद्यार्थियों में भारी नाराजगी हुई, जिसके चलते हड़ताल शुरू हुई। लेकिन पूरे मामले को अलग ही राजनीतिक रंग दे दिया गया, जिसकी शर्मनाक तस्वीरें पूरे प्रदेश ने देखीं।

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