Headlines

‘वोट से करेंगे चोट’: यूजीसी रोलबैक की मांग को लेकर देशनोक से जयपुर ‘सवर्ण न्याय यात्रा’ रवाना

Spread the love

600 किमी की पदयात्रा से राजस्थान में चुनावी बिगुल, करणी सेना और हिंदू महासभा ने सत्तापक्ष को दी चेतावनी

​बीकानेर/जयपुर। राजस्थान की ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी देशनोक शनिवार को एक बड़े सामाजिक और राजनीतिक आंदोलन की गवाह बनी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की नई गाइडलाइंस के विरोध में ‘श्री राजपूत करणी सेना’ और ‘राष्ट्रीय हिंदू महासभा’ के संयुक्त तत्वावधान में ‘सवर्ण न्याय यात्रा’ का शंखनाद हो गया है। मां करणी के मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और धोक लगाने के बाद, करीब 600 किलोमीटर लंबी इस पदयात्रा को जयपुर के लिए रवाना किया गया।

​आंदोलनकारियों ने साफ लफ्जों में चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने युवाओं के भविष्य को प्रभावित करने वाले इस फैसले को वापस (रोलबैक) नहीं लिया, तो आगामी चुनावों में लोकतांत्रिक तरीके से ‘वोट की चोट’ पहुंचाई जाएगी।

​देशभर के दिग्गज नेता पहुंचे देशनोक, आंदोलन को दिया राष्ट्रीय रूप

​इस पदयात्रा को धार देने के लिए देश के विभिन्न राज्यों से सामाजिक और राजनीतिक हस्तियां देशनोक पहुंचीं। यात्रा का नेतृत्व करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना और राष्ट्रीय हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कौशिक कर रहे हैं।

​मंच पर एकजुटता दिखाते हुए हरियाणा से करणी सेना के सूरजपाल सिंह अम्मू, बिहार के पूर्व सांसद व बाहुबली नेता आनंद मोहन सिंह, उत्तर प्रदेश के किसान नेता ठाकुर पूरण सिंह, ग्वालियर के अधिवक्ता अनिल मिश्रा और भाजपा नेता भगवान सिंह मेड़तिया सहित कई दिग्गजों ने हुंकार भरी। वक्ताओं ने इस आंदोलन को राजस्थान तक सीमित न रखकर राष्ट्रीय स्वरूप देने का आह्वान किया।

​”यह यात्रा किसी एक संगठन या जाति की नहीं, बल्कि युवाओं के सुनहरे भविष्य और सामाजिक न्याय की लड़ाई है। अगर जयपुर पहुंचने तक सरकार ने हमारी मांगें नहीं मानीं, तो यह आंदोलन पूरे प्रदेश में एक जन-आंदोलन का रूप ले लेगा।”

महिपाल सिंह मकराना, राष्ट्रीय अध्यक्ष, श्री राजपूत करणी सेना

​’यूजीसी रोलबैक नहीं तो वोट नहीं’ के लगे नारे

​जैसे ही भगवा ध्वज और गगनभेदी नारों के साथ यात्रा आगे बढ़ी, पूरा देशनोक आंदोलन के रंग में सराबोर नजर आया। युवाओं के हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर ‘यूजीसी रोलबैक नहीं तो वोट नहीं’ और ‘युवा विरोधी फैसला वापस लो’ जैसे कड़े संदेश लिखे थे।

​राष्ट्रीय हिंदू महासभा के अध्यक्ष विजय कौशिक ने कहा कि इस मुद्दे पर राजपूत और ब्राह्मण समाज पूरी तरह एक जाजम पर आ चुके हैं। मांग पूरी न होने तक आगामी निकाय, पंचायत या किसी भी चुनाव में सत्तापक्ष का खुलकर विरोध किया जाएगा।

​चुस्त जनप्रतिनिधियों पर फूटा गुस्सा, चूड़ियां भेजने की चेतावनी

​आंदोलन के दौरान सवर्ण समाज के सांसदों और विधायकों की चुप्पी पर भी गहरा आक्रोश देखा गया। हरियाणा के नेता सूरजपाल सिंह अम्मू ने तीखे तेवर दिखाते हुए कहा कि जो जनप्रतिनिधि समाज के वोटों से जीतकर सदन में बैठे हैं और आज युवाओं के हक में आवाज नहीं उठा रहे हैं, उन्हें देश भर से प्रतीकात्मक रूप से चूड़ियां भेजकर विरोध दर्ज कराया जाएगा। वहीं, बिहार के पूर्व सांसद आनंद मोहन सिंह ने कहा कि समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए वे किसी भी स्तर के संघर्ष या कुर्बानी से पीछे नहीं हटेंगे।

​जयपुर तक का सफर और आगे की रणनीति

​आयोजकों के मुताबिक, यह पदयात्रा 600 किलोमीटर का सफर तय करते हुए राजस्थान के विभिन्न शहरों और कस्बों से गुजरेगी। यात्रा का पहला पड़ाव पलाना में रखा गया है, जिसके बाद रविवार सुबह यह बीकानेर पहुंचेगी। बीकानेर में जिला कलेक्टर के माध्यम से राज्य सरकार को एक बड़ा ज्ञापन सौंपा जाएगा।

​जयपुर पहुंचने तक रास्ते में जगह-जगह जनसभाएं, नुक्कड़ नाटक और जनसंवाद के जरिए सवर्ण समाज और युवाओं को इस अभियान से जोड़ा जाएगा। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सरकार बैकफुट पर नहीं आती, उनका यह संघर्ष जारी रहेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *