जयपुर / कोटा ग्रामीण राजस्थान की कोटा ग्रामीण पुलिस ने दोपहिया वाहन चोरी करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने मामले में मुस्तैदी दिखाते हुए 5 आरोपियों को दबोच लिया है, जबकि उनके पास से चोरी की 37 मोटरसाइकिलें बरामद की गई हैं। यह गिरोह न सिर्फ राजस्थान के अलग-अलग जिलों बल्कि मध्य प्रदेश (MP) तक सक्रिय था।
कोटा ग्रामीण एसपी सुजीत शंकर के मुताबिक, पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और टेक्निकल इनपुट के आधार पर संदिग्धों को चिन्हित कर इस बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया।
ऐसे देते थे वारदात को अंजाम (Modus Operandi)
यह गिरोह बेहद शातिराना तरीके से काम करता था। गिरोह के सदस्य मुख्य रूप से सुनसान जगहों या सार्वजनिक पार्किंग में खड़ी बाइकों को निशाना बनाते थे।
चोरी और छिपाना: गाड़ी चोरी करने के बाद उन्हें सुरक्षित ठिकानों पर छिपा दिया जाता था।
फर्जी कागजात: गिरोह के कुछ सदस्य इन चोरी की बाइकों के फर्जी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (Fake RC) तैयार करते थे।
भोली जनता को निशाना: फर्जी कागजात तैयार होने के बाद, गिरोह के सदस्य ग्रामीण इलाकों के सीधे-साधे लोगों को झांसे में लेते थे। वे इन गाड़ियों को कम दाम में नहीं, बल्कि असली बताकर पूरी कीमत पर बेच देते थे।
कहाँ से बरामद हुईं कितनी गाड़ियां?
पुलिस द्वारा की गई छापेमारी में अब तक कुल 37 मोटरसाइकिलें बरामद हुई हैं, जिनका विवरण इस प्रकार है:
इलाका / राज्य बरामद बाइकों की संख्या
कोटा ग्रामीण – 08
कोटा शहर – 09
बूंदी – 06
झालावाड़ – 04
मध्य प्रदेश (MP) – 02
अनुसंधान जारी (जांच के अधीन) – 08
मुख्य आरोपी और उनका आपराधिक रिकॉर्ड
पकड़े गए आरोपियों में से कई का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है:
🟢 मुबारिक (30 वर्ष, खातौली): इसके खिलाफ पहले से 5 आपराधिक मामले दर्ज हैं।
🟢 दिलराज भील (29 वर्ष, सुकेत): इसके खिलाफ पूर्व में 2 मुकदमे दर्ज हैं।
🟢 रमेश कुमार उर्फ रामहेत बैरवा (45 वर्ष, चेचक)
🟢 टीकमचंद (40 वर्ष, सुनेल, झालावाड़)
नोट: गिरोह के दो अन्य मुख्य सदस्य, अनिल पोटर और दिनेश प्रजापति (जो मुख्य रूप से फर्जी RC बनाने का काम करते थे), फिलहाल फरार हैं। पुलिस टीमों का गठन कर दिया गया है और दावा है कि इन्हें भी जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।