जयपुर / गंगापुर सिटी 6 जुलाई, 2026 राजस्थान के करौली जिले की लाइफलाइन कहे जाने वाले पांचना बांध के गेट पूरे दो दशकों (20 साल) के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार खोल दिए गए हैं। सोमवार को जल संसाधन मंत्री सुरेश रावत और गृह राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढम ने मंत्रोच्चार और जल पूजन के बाद बटन दबाकर बांध से पानी की निकासी शुरू की।
इस ऐतिहासिक पल के साथ ही गंभीर नदी, कमांड क्षेत्र की नहरों और गुडला-पांचना लिफ्ट परियोजना को पानी मिलना शुरू हो गया। मंत्रियों ने इस मौके पर ₹61 करोड़ की लागत वाली गुडला-पांचना लिफ्ट परियोजना के जीर्णोद्धार और दो नई लिफ्ट परियोजनाओं का शिलान्यास भी किया। इस फैसले से करीब 21 राजस्व गांवों के किसानों के चेहरों पर खुशी की लहर दौड़ गई, लेकिन यह खुशी ज्यादा देर नहीं टिकी।
’पानी’ पर सियासत और सस्पेंस: गंगापुर सिटी में क्यों भड़के किसान?
बांध के गेट खुलते ही एक तरफ जहां जश्न का माहौल था, वहीं दूसरी तरफ सवाई माधोपुर के श्रीगंगापुर सिटी में तनाव फैल गया। कमांड एरिया के कुसाएं गांव में देखते ही देखते हजारों की संख्या में किसान और युवा सड़कों पर उतर आए।
गुस्से की वजह: किसानों का आरोप है कि प्रशासन ने गंभीर नदी के लिए तो तीन गेट 1-1 फीट तक खोल दिए, लेकिन कमांड एरिया की नहरों की तरफ जाने वाले गेटों को बहुत कम खोला गया है।
किसानों के बीच इस बात को लेकर भारी संशय और नाराजगी है कि अगर गेट पूरी तरह नहीं खुले, तो उनकी टेल (नहर के आखिरी छोर) तक सिंचाई का पानी कैसे पहुंचेगा।
हिंडौन मार्ग ठप, प्रशासन के फूले हाथ-पैर
नाराज किसानों ने अपनी मांगों को लेकर गंगापुर सिटी-हिंडौन मार्ग पर कुशाय गांव के पास चक्काजाम कर दिया। सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और देखते ही देखते प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। मौके पर भारी पुलिस बल और आला अधिकारी किसानों को समझाने की कोशिशों में जुटे हैं।
टेस्टिंग के लिए छोड़ा गया पानी, मंत्रियों ने बताया ‘ऐतिहासिक जीत’
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, पहले चरण में कैचमेंट और कमांड एरिया में सिस्टम की तकनीकी जांच (टेस्टिंग) के लिए करीब दो से ढाई घंटे पानी छोड़ा गया है।
जल संसाधन मंत्री सुरेश रावत ने कहा, “मुख्यमंत्री की दूरदर्शी सोच और दोनों पक्षों के आपसी तालमेल से यह 20 साल पुराना विवाद हमेशा के लिए सुलझ गया है। अब किसानों को सिंचाई के लिए नियमित पानी मिलेगा।”
प्रभारी मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने इसे किसानों के लंबे संघर्ष की एक बड़ी जीत बताया और कहा कि इससे पूरे इलाके की कृषि व्यवस्था का कायाकल्प हो जाएगा।
20 साल पुराने इस विवाद का कागजों और बांध पर सुलझना जितनी बड़ी राहत थी, जमीनी स्तर पर पानी के समान वितरण को लेकर किसानों का यह गुस्सा प्रशासन के लिए अब एक नई चुनौती बन गया है।