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‘हे भगवान, ये दिन क्यों दिखाया…’ बेटे-बहू और पोते-पोती को खोकर बिलख उठा बुजुर्ग पिता

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पाली में एक ही चिता पर जली चार जिंदगियां, अंधविश्वास ने पूरे परिवार को निगला

पाली। राजस्थान के पाली जिले के रोहट क्षेत्र के बीठू गांव में बुधवार को ऐसा दर्दनाक मंजर देखने को मिला, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। एक ही परिवार के चार सदस्यों—पति, पत्नी और उनके दो मासूम बच्चों—का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया गया। जैसे ही चारों अर्थियां घर से निकलीं, पूरे गांव में मातम पसर गया और अंतिम यात्रा में शामिल लोगों की आंखें भर आईं।

सबसे अधिक मार परिवार के बुजुर्ग माता-पिता पर पड़ी। लकवे से पीड़ित पिता अपने बेटे, बहू और पोते-पोती को खोने का गम सह नहीं पाए। अंतिम संस्कार के दौरान वे बार-बार भगवान से सवाल करते रहे कि आखिर बुढ़ापे में उन्हें यह दुख क्यों देखना पड़ा। परिजन और ग्रामीण उन्हें संभालने की कोशिश करते रहे, लेकिन माहौल बेहद भावुक बना रहा।

जानकारी के अनुसार, परिवार का मुखिया गेनाराम अपने बूढ़े और असहाय माता-पिता तथा दिव्यांग भाई की जिम्मेदारी उठाने के लिए दूर क्षेत्र में खेती करता था। इसी बीच उसकी पत्नी की मानसिक स्थिति बिगड़ने लगी। समय पर चिकित्सकीय उपचार कराने के बजाय उसने अंधविश्वास का सहारा लिया। बताया जा रहा है कि एक तांत्रिक के बहकावे में आकर वह गहरे भय और भ्रम में चला गया, जिसके बाद उसने ऐसा कदम उठा लिया जिससे पूरा परिवार हमेशा के लिए खत्म हो गया।

यह घटना एक बार फिर इस बात की चेतावनी देती है कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का इलाज केवल योग्य डॉक्टरों से ही कराया जाना चाहिए। अंधविश्वास और झाड़-फूंक जैसे भ्रम कई बार पूरे परिवार की जिंदगी तबाह कर सकते हैं। फिलहाल गांव में शोक का माहौल है और हर कोई इस दर्दनाक त्रासदी से स्तब्ध है।

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