9 साल की उम्र में बहन को खोने का दर्द बना जीवन का संकल्प, उसी सड़क पर अस्पताल बनाकर डॉ. अश्वनी बगड़िया ने लिखी सेवा की मिसाल

Spread the love

राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस विशेष: इलाज से पहले इंसान… गरीब मरीजों के लिए उम्मीद बना वंदना मेमोरियल हॉस्पिटल

जयपुर, 01 जुलाई। कुछ कहानियां सफलता की नहीं, बल्कि दर्द से जन्मे संकल्प की होती हैं। राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस पर जयपुर के शास्त्री नगर से ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। वर्ष 2003 में सड़क दुर्घटना में अपनी बहन को समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण खोने वाले 9 वर्षीय अश्वनी बगड़िया ने उसी दिन डॉक्टर बनने और उसी सड़क पर अस्पताल बनाने का संकल्प लिया था। वर्षों की कठिन मेहनत, मेडिकल शिक्षा और संघर्ष के बाद उन्होंने अपना यह सपना पूरा कर दिखाया।

डॉ. अश्वनी बगड़िया बताते हैं कि बहन की दुर्घटना के बाद उन्हें तत्काल बेहतर चिकित्सा सुविधा नहीं मिल सकी, जिसके कारण उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। इस दर्दनाक घटना ने उनके मन में यह संकल्प पैदा किया कि भविष्य में किसी भी परिवार को इलाज के अभाव में अपनों को न खोना पड़े।

मेडिकल शिक्षा पूरी करने के बाद उन्हें विदेश और दिल्ली में बेहतर अवसर मिले, लेकिन उन्होंने जयपुर लौटकर शास्त्री नगर में वंदना मेमोरियल हॉस्पिटल की स्थापना की। अस्पताल का नाम उन्होंने अपनी दिवंगत बहन वंदना की स्मृति में रखा। उनका कहना है कि यह अस्पताल केवल एक चिकित्सा संस्थान नहीं, बल्कि अपनी बहन से किए गए वादे का प्रतीक है।

डॉ. बगड़िया का दावा है कि अस्पताल में इमरजेंसी मरीजों का इलाज बिना अनावश्यक देरी के शुरू किया जाता है। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए भी उपचार को प्राथमिकता दी जाती है। उन्होंने बताया कि हाल ही में एक सड़क दुर्घटना में घायल मरीज, जिसके इलाज पर लगभग चार लाख रुपये का खर्च आने वाला था, उसकी आर्थिक स्थिति को देखते हुए मात्र एक लाख रुपये में उपचार किया गया और केवल पांच हजार रुपये जमा कर इलाज शुरू कर दिया गया।

अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि यहां मरीज की जान को सबसे पहले महत्व दिया जाता है। मैनेजमेंट इंचार्ज प्रिया चौधरी के अनुसार अस्पताल की नीति स्पष्ट है कि इमरजेंसी में पहले उपचार और बाद में औपचारिकताएं पूरी की जाएं।

डॉ. अश्वनी बगड़िया ने सरकार से अपील करते हुए कहा कि यदि उनके अस्पताल को राज्य की कैशलेस स्वास्थ्य योजना से जोड़ा जाए तो जरूरतमंद मरीजों को और अधिक निःशुल्क एवं बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा। उनका मानना है कि सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होने पर गरीब मरीजों को निजी अस्पतालों में भी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकती हैं।

राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस पर डॉ. अश्वनी बगड़िया की यह कहानी बताती है कि एक भाई का दर्द यदि संकल्प बन जाए, तो वह हजारों लोगों के जीवन में नई उम्मीद और नई जिंदगी का कारण बन सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *