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किरोड़ी लाल मीणा ने सीएम को लिखा पत्र, गोविंद सिंह डोटासरा और समधी पर फर्जी OBC प्रमाण पत्र के आरोप, FIR की मांग

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जयपुर: राजस्थान के कैबिनेट मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर डोटासरा और उनके समधी रमेशचंद पूनिया पर फर्जी ओबीसी प्रमाण पत्र बनवाने और आरएएस भर्ती में अनुचित लाभ लेने का आरोप लगाया है। किरोड़ी लाल मीणा ने मांग की है कि इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच की जाए। पत्र में कहा गया है कि डोटासरा के पुत्र अविनाश का आरएएस 2016 में चयन हुआ था और उसे साक्षात्कार में अधिक अंक दिए गए।

चयन प्रक्रिया पर सवाल:

उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकतम अंक पाने वाले अभ्यर्थी को कम अंक देकर चयन प्रक्रिया पर सवाल उठे। किरोड़ी ने यह भी कहा कि रमेशचंद पूनिया के परिवार को ओबीसी आरक्षण का लाभ फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मिला। उन्होंने दावा किया कि उनके बच्चों का चयन भी आरएएस में इसी आधार पर हुआ। आरोपों में कहा गया है कि आरपीएससी के कुछ पूर्व सदस्यों ने भी दबाव डालने की बात स्वीकार की है। मंत्री का कहना है कि यदि जांच एजेंसियां चाहें तो वे सभी प्रमाण प्रस्तुत करने को तैयार हैं।

छात्रा का दिया उदाहरण:

किरोड़ी लाल मीणा ने आरोप लगाया कि आरएएस भर्ती 2016 की मुख्य परीक्षा में सर्वाधिक 425 अंक पाने वाली गरिमा जिंदल को साक्षात्कार में सिर्फ 25 अंक दिए गए। उन्होंने कहा कि दूसरी ओर डोटासरा के प्रभाव के चलते उनके पुत्र अविनाश को साक्षात्कार में 85 अंक मिले, जिससे उनका चयन संभव हो सका। किरोड़ी का कहना है कि अधिक अंक होने के बावजूद गरिमा जिंदल को इंटरव्यू में कम अंक दिए जाने से वह आरएएस के मूल चयन से वंचित रह गईं।

निष्पक्ष जांच की मांग:

किरोड़ी लाल मीणा ने कहा है कि यह मामला गरीब और योग्य अभ्यर्थियों के अधिकारों से जुड़ा है और इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। उन्होंने मुख्यमंत्री से तुरंत कार्रवाई की अपील की है ताकि भविष्य में ऐसी अनियमितताओं पर रोक लग सके। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो युवाओं के भरोसे पर असर पड़ेगा। उन्होंने पूरे प्रकरण को गंभीर बताते हुए उच्च स्तर पर जांच की मांग दोहराई है। इस पूरे मामले से राजस्थान की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। सरकार की ओर से अभी इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच बयानबाजी तेज होने की संभावना है।

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