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नागौर. प्रसूता की मौत पर अस्पताल के बाहर धरना, परिजनों ने चिकित्सकों पर लगाया लापरवाही का आरोप

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जयपुर: नागौर में जेएलएन अस्पताल के एमसीएच विंग में सोमवार शाम एक प्रसूता की मौत के बाद मंगलवार को मामला गरमा गया। मृतका के परिजनों एवं सर्वसमाज के लोगों ने अस्पताल की मोर्चरी के बाहर धरना देकर चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ पर उपचार में लापरवाही का आरोप लगाया तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। वहीं मृतका के परिजनों को मुआवजा देने की मांग भी की गई है।

नर्सिंगकर्मियों पर लापरवाही का आरोप:

जानकारी के अनुसार खींवसर क्षेत्र के दूजासर निवासी रूकमा पुत्री सुमेराराम मेघवाल को 21 जून को जेएलएन अस्पताल के एमसीएच विंग नागौर के महिला वार्ड में भर्ती कराया गया था। 22 जून को सुबह 9 बजे सामान्य प्रसव हुआ, लेकिन दोपहर बाद तबीयत बिगड़ने लगी और शाम 6 बजे जोधपुर रेफर करते समय मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि उपचार के दौरान चिकित्सकीय एवं नर्सिंग स्तर पर गंभीर लापरवाही बरती गई, जिसके कारण प्रसूता की मृत्यु हो गई। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद संबंधित चिकित्सकों ने अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए मृतका को उच्च केंद्र रेफर करने की प्रक्रिया का सहारा लिया।

बधाई के नाम पर रुपए लेने का आरोप:

रूकमा की ननद साबू ने आरोप लगाया कि नर्सिंग स्टाफ ने उनसे चार-पांच हजार रुपए बधाई के भी लिए। रूकमा ने पीठ में दर्द की शिकायत की तो दो इंजेक्शन लगाए। फिर भी दर्द कम नहीं होने पर नर्सिंगकर्मी बोले – जोधपुर ले जाओ।

दोषी कार्मिकों पर कार्रवाई की मांग:

धरने के दौरान जिला कलक्टर के नाम सौंपे गए ज्ञापन में मृतका के पिता सुमेरराम मेघवाल एवं सर्वसमाज के प्रतिनिधियों ने पांच प्रमुख मांगें रखीं। इनमें प्रसूता के उपचार में कथित लापरवाही बरतने वाले चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी, दोषी कार्मिकों को तत्काल निलंबित करने, प्रशासन की निगरानी में मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराने, नवजात बच्ची के भरण-पोषण की जिम्मेदारी राज्य सरकार द्वारा उठाने तथा मृतका के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी के साथ 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने की मांग शामिल है। धरनास्थल पर बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा। वहीं अस्पताल प्रशासन की ओर से मामले की जांच और नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने की जानकारी मिली है।

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