देवासी से सवाल: प्रेस कॉन्फ्रेंस में रामझरोखा प्रकरण से जुड़े इन सवालों के जवाब क्यों नहीं मिले?
राज्यमंत्री देवासी की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर उठे सवाल—रामझरोखा भूमि के पट्टों और ADM जांच पर चुप्पी क्यों?
सिरोही। ( रिपोर्टर, महेंद्र सिंह परिहार ) राज्यमंत्री ओटाराम देवासी द्वारा रामझरोखा मंदिर प्रकरण को लेकर की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद पूर्व विधायक संयम लोढ़ा की ओर से कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं। लोढ़ा का कहना है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया, जिनसे इस पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जनता के सामने आ सकती है।
लोढ़ा ने सवाल उठाया कि रामझरोखा की बगीची भूमि पर बने बताए जा रहे 8 पट्टों की जांच ADM के स्तर पर करीब चार माह से लंबित है तो इस जांच को पूरा करवाकर रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही? यदि सरकार सच सामने लाना चाहती है तो जांच पूरी कराकर दूध का दूध और पानी का पानी जनता के सामने रखा जाना चाहिए।
उन्होंने लाल वेरा की भूमि नगर परिषद द्वारा सेवा भारती को दिए जाने के मामले पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि नियमों के विपरीत होने के आरोपों के बावजूद इस मुद्दे पर सरकार की ओर से कोई स्पष्ट कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है।
लोढ़ा ने कहा कि यदि यह मान भी लिया जाए कि पूर्व विधायक के कार्यकाल में रामझरोखा भूमि से जुड़े कोई गलत पट्टे जारी हुए थे, तो वर्तमान सरकार को सत्ता में आए करीब 32 माह हो चुके हैं। ऐसे में सवाल है कि अब तक उन पट्टों की जांच और कार्रवाई क्यों नहीं करवाई गई? उन्होंने पूछा कि सरकार केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगी या कथित गलत पट्टों की जांच कर उन्हें निरस्त कराने की कार्रवाई भी करेगी?
उन्होंने राज्यमंत्री के पूर्व में दिए गए उस बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें कथित तौर पर गलत बने पट्टों का “बड़ा पिटारा” खोलने की बात कही गई थी। लोढ़ा का सवाल है कि यदि गलत पट्टे मौजूद हैं तो अब तक एक भी पट्टा सार्वजनिक रूप से सामने क्यों नहीं रखा गया?
विनोद देवड़ा से जुड़े कथित गलत पट्टे को लेकर भी सवाल उठाया गया है। लोढ़ा ने कहा कि यदि कोई पट्टा गलत तरीके से जारी हुआ है तो सरकार और प्रशासन के पास उसे नियमानुसार जांचने एवं आवश्यक कार्रवाई करने का अधिकार है। ऐसे में कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है?
इसके साथ ही रामझरोखा भूमि की 99 वर्ष की लीज आदर्श विद्या मंदिर को दिए जाने के मामले में भी ADM की जांच पूरी कराने की मांग उठाई गई है। लोढ़ा का कहना है कि जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जनता के सामने स्पष्ट हो सकेगी।
सबसे बड़ा सवाल वर्ष 2002 में बगीची भूमि के पट्टे को लेकर उठाया गया है। लोढ़ा का दावा है कि पट्टा रामझरोखा मंदिर के नाम से होना चाहिए था, लेकिन इसे व्यक्ति के नाम से जारी किया गया। उनका आरोप है कि इसी वजह से बाद में भूमि के उपविभाजन और बिक्री को लेकर विवाद की स्थिति बनी।
लोढ़ा ने कहा कि बगीची की भूमि को लेकर दस्तावेजों और संबंधित रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है। उन्होंने सरकार से मांग की कि सभी संबंधित पट्टों, लीज, उपविभाजन और भूमि हस्तांतरण के दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच कराकर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, ताकि जनता के सामने तथ्य स्पष्ट हो सकें।
अब सवाल यही है कि इन आरोपों और सवालों पर सरकार तथा प्रशासन कब स्पष्ट जवाब देंगे? रामझरोखा भूमि प्रकरण में अंतिम सच जांच और आधिकारिक दस्तावेजों से ही सामने आएगा।