8 साल से 30 हजार के फसली ऋण के लिए भटक रहा 78 वर्षीय किसान, 100 से ज्यादा बार लगाए सरकारी दफ्तरों के चक्कर

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जोधपुर/बिलाड़ा। सरकारी योजनाओं का लाभ किसानों तक समय पर पहुंचाने के दावों के बीच बिलाड़ा उपखंड के जेलवा गांव के 78 वर्षीय किसान मोहनलाल मेघवाल की कहानी व्यवस्था पर कई सवाल खड़े करती है। वॉकर के सहारे चलने वाले बुजुर्ग किसान पिछले आठ वर्षों से मात्र 30 हजार रुपये के अल्पकालीन फसली ऋण के लिए सरकारी कार्यालयों और जनसुनवाई शिविरों के लगातार चक्कर लगा रहे हैं।

किसान का कहना है कि वर्ष 2018 से बायोमेट्रिक सत्यापन में तकनीकी समस्या बताकर उन्हें ऋण देना बंद कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों और शिविरों में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन आज तक समस्या का समाधान नहीं हो सका। उनका दावा है कि वे अब तक 100 से अधिक बार विभिन्न कार्यालयों और जनसुनवाई कार्यक्रमों में अपनी फरियाद लेकर पहुंच चुके हैं।

चार बार शिकायत, फिर भी नहीं निकला समाधान

मोहनलाल मेघवाल के अनुसार उन्होंने सबसे पहले 8 नवंबर 2021 को प्रशासन गांवों के संग अभियान के शिविर में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद 19 मई 2022 को फॉलोअप शिविर, 14 जुलाई 2022 तथा 9 अप्रैल 2025 को उपखंड स्तरीय जनसुनवाई में भी परिवाद प्रस्तुत किया। बावजूद इसके उनका प्रकरण आज भी लंबित है।

समिति ने बताई तकनीकी समस्या

जेतीवास ग्राम सेवा सहकारी समिति के प्रबंधन के अनुसार मामला तकनीकी कारणों से जुड़ा हुआ है। समिति स्तर से प्रकरण बैंक को भेजा जा चुका है और आगे की कार्रवाई के लिए इसे उच्च स्तर पर अग्रेषित किया गया है।

शिकायत निवारण व्यवस्था पर उठे सवाल

करीब आठ वर्षों से लंबित इस मामले ने शिकायत निवारण प्रणाली की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि एक बुजुर्ग किसान को अपने वैध फसली ऋण के लिए वर्षों तक भटकना पड़े, तो जनसुनवाई और प्रशासनिक शिविरों की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। अब सभी की नजर प्रशासन की आगामी कार्रवाई और इस प्रकरण के समाधान पर टिकी हुई है।

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