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बाड़मेर: सीएमएचओ कार्यालय बाड़मेर में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों का क्षमता संवर्धन प्रशिक्षण आयोजित-डिजिटल तकनीकों के माध्यम से मधुमेह एवं उच्च रक्तचाप प्रबंधन को सुदृढ़ बनाने पर दिया गया विशेष जोर

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बाड़मेर, 05 अगस्त। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय, बाड़मेर में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान के सहयोग से डिजिकेयर परियोजना के अंतर्गत सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के क्षमता संवर्धन प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में मधुमेह एवं उच्च रक्तचाप जैसे गैर-संचारी रोगों के प्रभावी प्रबंधन के लिए डिजिटल तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देना तथा स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करना रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रतिभागियों के पंजीकरण के साथ हुआ। इसके पश्चात मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विष्णुराम विश्नोई, उप मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. महिपाल सिंह सोढ़ा, डीपीसी तनु सिंह सोढ़ा एवं एफसीएलसी राजेश मिश्रा ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए प्रशिक्षण के उद्देश्य एवं महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गैर-संचारी रोगों की बढ़ती चुनौती को देखते हुए डिजिटल प्लेटफॉर्म एवं तकनीकों का प्रभावी उपयोग समय की आवश्यकता है।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों का प्री-ट्रेनिंग असेसमेंट लिया गया, जिसके माध्यम से उनकी पूर्व जानकारी का मूल्यांकन किया गया।तकनीकी सत्रों में राष्ट्रीय गैर-संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी दी गई। इस दौरान सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों की भूमिका एवं जिम्मेदारियों पर डॉ. स्वाति जाधव (कंसल्टेंट) ने विस्तार से जानकारी दी। पीटीएस अधिकारी लोकेश दैय्या ने एनपी-एनसीडी सीएचओ पोर्टल की कार्यप्रणाली, डेटा एंट्री एवं रिपोर्टिंग प्रक्रिया का प्रस्तुतीकरण किया तथा प्रतिभागियों को पोर्टल का लाइव डेमोंस्ट्रेशन एवं हैंड्स-ऑन प्रैक्टिस भी करवाई। इसके अतिरिक्त सुरभि कुशवाहा द्वारा एनएम ऐप, पल्लवी पाठक द्वारा ऑफलाइन आशा ऐप तथा डॉ. महेन्द्र बिजारणिया द्वारा पीसीटीएस ऐप के उपयोग एवं महत्व की जानकारी दी गई।प्रशिक्षण के दौरान जिला कार्यक्रम समन्वयक (डीपीसी) राकेश भाटी ने सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) को राष्ट्रीय गैर-संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एनपी-एनसीडी) के प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में आवश्यक जानकारी प्रदान की। उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से मधुमेह एवं उच्च रक्तचाप से ग्रसित मरीजों के समय पर पंजीकरण, नियमित स्क्रीनिंग, फॉलोअप, उपचार एवं डेटा की शत-प्रतिशत ऑनलाइन प्रविष्टि सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सीएचओ स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों पर आने वाले प्रत्येक पात्र लाभार्थी की गुणवत्तापूर्ण जांच कर डिजिटल पोर्टल पर समयबद्ध रिपोर्टिंग सुनिश्चित करें, जिससे रोगियों को निरंतर एवं बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें। साथ ही उन्होंने प्रशिक्षण में प्राप्त तकनीकी जानकारी का क्षेत्र स्तर पर प्रभावी उपयोग करते हुए गैर-संचारी रोगों की रोकथाम एवं नियंत्रण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

तकनीकी सत्र में शेर सिंह ने मेडिकल ऑफिसर पोर्टल के संचालन एवं उपयोग पर प्रशिक्षण दिया:

इसके पश्चात डॉ. दामिनी सिंह (कंसल्टेंट) ने ई-संजीवनी टेली-कंसल्टेशन प्लेटफॉर्म की कार्यप्रणाली, लाभ एवं व्यवहारिक उपयोग पर विस्तार से जानकारी दी तथा प्रतिभागियों को लाइव डेमोंस्ट्रेशन एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया। प्रशिक्षण के अंत में विशेषज्ञों द्वारा प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया। इसके पश्चात पोस्ट-ट्रेनिंग असेसमेंट के माध्यम से प्रशिक्षण की प्रभावशीलता का मूल्यांकन किया गया।कार्यक्रम के समापन पर डॉ. महिपाल सिंह सोढ़ा, तनु सिंह सोढ़ा एवं राजेश मिश्रा ने सभी प्रतिभागियों, प्रशिक्षकों एवं आयोजन सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण से स्वास्थ्य अधिकारियों की दक्षता में वृद्धि होगी तथा डिजिटल माध्यमों से गैर-संचारी रोगों की स्क्रीनिंग, उपचार, फॉलोअप एवं निगरानी व्यवस्था और अधिक प्रभावी बन सकेगी। उन्होंने सभी सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों से प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान का उपयोग क्षेत्रीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में करने का आह्वान किया।

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