ब्रह्मकुमारीज़ के ‘मनमोहिनीवन’ में 5-दिवसीय राष्ट्रीय दिव्यांगजन सम्मेलन का भव्य शुभारंभ
देश के कोने-कोने से जुटे श्रवण और अस्थि बाधित प्रतिभागी; आत्मविश्वास और राजयोग से सशक्तिकरण का संदेश
आबूरोड। सफलता की राह में शारीरिक बाधाएँ कभी रोड़ा नहीं बन सकतीं, बशर्ते इरादे बुलंद हों। इसी संदेश के साथ ब्रह्मकुमारीज़ संस्थान के दिव्यांगजन सेवा प्रभाग द्वारा मनमोहिनीवन में **”श्रवण बाधित एवं अस्थि बाधित दिव्यांगजनों की आंतरिक प्रतिभाओं की खोज” विषय पर आधारित पाँच दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आगाज हुआ।
उद्घाटन सत्र में देश के अलग-अलग राज्यों से पहुँचे प्रतिभागियों का स्वागत पारंपरिक अंदाज में बैज, पुष्पगुच्छ और स्मृति-चिह्न देकर किया गया। इस दौरान विशेष प्रतिभागियों द्वारा प्रस्तुत प्रेरणादायी नृत्य और स्वागत गीत ने समारोह में समां बाँध दिया।

मुख्य वक्ताओं के विचार: प्रेरणा और आत्मविश्वास की बातें
पद्मश्री सत्येंद्र सिंह लोहिया (अंतरराष्ट्रीय पैरा तैराक):
“दिव्यांगता केवल शरीर तक सीमित हो सकती है, मन या विचारों में नहीं। जीवन में कैसी भी परिस्थितियाँ आएँ, मजबूत इच्छाशक्ति और सकारात्मक दृष्टिकोण से हर चुनौती को पार किया जा सकता है। अपनी छुपा प्रतिभा को पहचानें और आगे बढ़ें।”
अजय रावत (अंतरराष्ट्रीय पैरा थ्रोबॉल खिलाड़ी):
“कठिन दौर ही इंसान को तराश कर मजबूत बनाता है। चुनौतियों को रुकावट न मानकर अवसर के रूप में देखें। अनुशासन, आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास से ही सफलता की ऊँचाइयाँ हासिल होती हैं।”
बीके प्रेम दीदी (वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका):
“हर व्यक्ति के भीतर असीम क्षमताएँ छिपी हैं। राजयोग के नियमित अभ्यास से मानसिक शक्ति का विकास होता है और दृष्टिकोण सकारात्मक बनता है। जब आप खुद पर भरोसा करते हैं, तो कोई भी मंजिल असंभव नहीं रहती।”

बीके अतुल भाई (दिव्यांगजन सेवा प्रभाग):
“संस्थान का ध्येय केवल हुनर सिखाना नहीं, बल्कि हर व्यक्ति के भीतर आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की ज्योति जलाना है। आध्यात्मिक दृष्टि से प्रत्येक आत्मा विशेष है।”
एएस टैगोर (मैनेजर, गेल इंडिया – आबूरोड):
“समाज के सर्वांगीण विकास के लिए सभी को समान अवसर मिलना जरूरी है। ब्रह्मकुमारीज़ का यह प्रयास दिव्यांगजनों के जीवन में नई चेतना और सम्मान का संचार कर रहा है।”

क्या रहेगा 5 दिनों के आयोजन में खास?
सम्मेलन के दौरान प्रतिभागियों के सर्वांगीण विकास और मनोरंजन के लिए कई गतिविधियों की रूपरेखा तैयार की गई है:
मानसिक सशक्तीकरण: राजयोग ध्यान एवं विशेष आध्यात्मिक सत्र।
कौशल विकास: मूल्यनिष्ठ खेल, प्रशिक्षण कार्यशालाएँ और गाइडेंस सेशंस।
सांस्कृतिक एवं भ्रमण: दर्शनीय स्थलों का भ्रमण और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ।