बाड़मेर | 9 जुलाई 2026 राजस्थान का बाड़मेर अब देश के ऊर्जा मानचित्र पर और अधिक मजबूत पहचान बनाने जा रहा है। पचपदरा रिफाइनरी के संचालन के बाद बाड़मेर–सांचौर बेसिन से कच्चे तेल के उत्पादन को मौजूदा 70–80 हजार बैरल प्रतिदिन से बढ़ाकर 3 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंचाने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए करीब 1000 नए तेल कुओं की ड्रिलिंग की जाएगी।
वर्तमान में बाड़मेर देश के सबसे बड़े तेल उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है। वर्ष 2025 में यहां से 10.2 मिलियन टन कच्चे तेल का उत्पादन हुआ, जो भारत के कुल घरेलू उत्पादन का लगभग 35 प्रतिशत रहा।
9 मिलियन टन वार्षिक क्षमता वाली पचपदरा रिफाइनरी के लिए 1.5 मिलियन टन कच्चा तेल बाड़मेर–सांचौर बेसिन से उपलब्ध कराया जाएगा, जबकि शेष तेल का आयात किया जाएगा। बढ़ती मांग को देखते हुए तेल उत्पादन क्षमता में तेजी से विस्तार की योजना पर काम शुरू हो चुका है।
तेल उत्पादन बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीकों जैसे Enhanced Oil Recovery (EOR), Polymer Injection और Alkaline Surfactant Polymer का उपयोग किया जा रहा है। इन तकनीकों के जरिए तेल रिकवरी दर में उल्लेखनीय वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है।
अब तक करीब 550 तेल कुओं को मंगला प्रोसेसिंग टर्मिनल (MPT) के माध्यम से पचपदरा रिफाइनरी से जोड़ा जा चुका है। मंगला, भाग्यम और ऐश्वर्या ऑयल फील्ड इस परियोजना के प्रमुख केंद्र हैं। अब लगभग 1000 नए कुएं विकसित किए जाएंगे, जिन पर करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश की योजना है।
केयर्न वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल पहले ही बाड़मेर–सांचौर बेसिन से तेल उत्पादन को 3 लाख बैरल प्रतिदिन तक ले जाने की योजना की घोषणा कर चुके हैं। इस परियोजना के सफल होने से राजस्थान न केवल देश की ऊर्जा सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभाएगा, बल्कि क्षेत्र में रोजगार, उद्योग और आर्थिक विकास को भी नई गति मिलेगी।