बाड़मेर, 7 जुलाई। युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से बचाने और कानूनी जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से बाड़मेर जिले में मंगलवार को ‘ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूजडेज’ अभियान के तहत व्यापक कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशन में जिले के 17 सरकारी और निजी विद्यालयों में न्यायिक अधिकारियों ने स्वयं पहुंचकर विद्यार्थियों को नशामुक्त जीवन का संदेश दिया।
अभियान का मुख्य संदेश “नशे को ना, अपने सपनों को हां” रहा। सुबह की प्रार्थना सभा के बाद आयोजित विशेष सत्रों में कक्षा 8 से 12 तक के छात्र-छात्राओं को नशे के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और कानूनी दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के दौरान न्यायिक अधिकारियों ने बताया कि साथियों का दबाव, जिज्ञासा, सोशल मीडिया का प्रभाव और मानसिक तनाव जैसे कारण युवाओं को नशे की ओर धकेल सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को इन परिस्थितियों से सतर्क रहने और सही निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया।
शिविरों में एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के प्रमुख प्रावधानों की भी जानकारी दी गई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के मामलों में कानून सुधार और पुनर्वास को प्राथमिकता देता है, ताकि उनका भविष्य सुरक्षित रह सके।
छात्रों को तंबाकू, शराब, स्मैक, व्हाइटनर समेत विभिन्न नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों, ऑनलाइन ड्रग नेटवर्क, ब्लैकमेलिंग और साइबर शोषण जैसे बढ़ते खतरों से भी अवगत कराया गया। साथ ही उन्हें किसी भी प्रकार के नशे के प्रस्ताव को दृढ़ता से ठुकराने और ऐसी जानकारी तुरंत अभिभावकों या विद्यालय प्रशासन को देने का संकल्प दिलाया गया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों में कानूनी जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें स्वस्थ, सुरक्षित और नशामुक्त भविष्य की ओर प्रेरित करना है।