सिरोही। सिरोही जिले में झोलाछाप डॉक्टरों और बिना वैध पंजीकरण संचालित हो रहे निजी अस्पतालों का नेटवर्क लगातार फैलता जा रहा है। आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग की ढीली निगरानी और प्रशासनिक उदासीनता के कारण कई स्थानों पर बिना आवश्यक अनुमति और योग्य चिकित्सकों के अस्पताल एवं क्लीनिक संचालित हो रहे हैं। ऐसे संस्थानों में मरीजों की जान जोखिम में डालकर इलाज किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी अस्पताल या क्लीनिक का निर्धारित नियमों के अनुसार पंजीकरण होना आवश्यक है तथा चिकित्सकों का संबंधित मेडिकल परिषद में पंजीकृत होना अनिवार्य है।
गौरतलब है कि सिरोही जिले में पहले भी कथित झोलाछाप डॉक्टरों के इलाज से गंभीर घटनाएं सामने आ चुकी हैं। वर्ष 2025 में गलत इंजेक्शन लगाने के आरोप में एक नाबालिग बच्ची की मौत के मामले में पुलिस ने एक कथित झोलाछाप चिकित्सक को गिरफ्तार किया था।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिले के कई कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में बिना पंजीकरण अस्पताल एवं क्लीनिक खुलेआम संचालित हो रहे हैं। यदि इन आरोपों में सच्चाई है, तो यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि आम लोगों के स्वास्थ्य और जीवन से जुड़ा गंभीर विषय है। और इनके लिए निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

जनता की प्रमुख मांगें:
जिले में संचालित सभी निजी अस्पतालों और क्लीनिकों की विशेष जांच कराई जाए।
बिना वैध पंजीकरण चल रहे अस्पतालों को तत्काल सील किया जाए।
झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
स्वास्थ्य विभाग नियमित निरीक्षण कर कार्रवाई की रिपोर्ट सार्वजनिक करे।
मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हेल्पलाइन और शिकायत व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाए।
समापन:
यदि समय रहते अवैध अस्पतालों और झोलाछाप डॉक्टरों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में और भी गंभीर घटनाएं सामने आ सकती हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वे निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई करें तथा आमजन का भरोसा स्वास्थ्य व्यवस्था पर कायम रखें।