सिरोही 11 बहनों के इकलौते भाई हर्षित बनेंगे जैन मुनिराज, लेंगे दीक्षा, वरघोड़े में गूंजे जयघोष

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सिरोही। जैन धर्म की प्रभावना और संयम परंपरा के लिए पहचान रखने वाला सिरोड़ी गांव शनिवार को एक और ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनेगा। गांव के 30 वर्षीय हर्षित जितेन्द्र संघवी शनिवार सुबह संयम जीवन स्वीकार कर दीक्षा ग्रहण करेंगे। इसके साथ ही सिरोड़ी से दीक्षा लेने वाले मुमुक्षुओं की संख्या बढ़कर 52 हो जाएगी। दीक्षा समारोह आचार्य रविरत्नसूरी महाराज की निश्रा में शनिवार सुबह 7.30 बजे आयोजित होगा। इस अवसर पर आचार्य जयेशरत्नसूरी, पंन्यास वैराग्यरत्नविजय, श्रुतरत्नविजय, मुनिराज नम्ररत्नविजय, जिनवररत्नविजय, क्षमावीररत्नविजय एवं भावश्रुतरत्नविजय सहित अनेक संत-साध्वियां उपस्थित रहकर मुमुक्षु को आशीर्वाद देंगे।

परिवार में 6 सदस्यों ने अपनाया संयम मार्ग:

हर्षित संघवी ऐसे परिवार से हैं, जहां संयम की समृद्ध परंपरा रही है। संघवी शांतिलाल पूनमचंद परिवार के अब तक 6 सदस्य दीक्षा ग्रहण कर साधु-साध्वी जीवन अपना चुके हैं। इनमें मुनिराज जिनवररत्नविजय, साध्वी मौलिकरेखाश्रीजी, धन्यरेखाश्रीजी, मोक्षार्थीरेखाश्रीजी, भव्यार्थीरेखाश्रीजी तथा हर्षित की बहन श्रुतरेखाश्रीजी शामिल हैं।

भव्य वरघोड़े में उमड़ी श्रद्धा:

दीक्षा से पूर्व शुक्रवार सुबह मुमुक्षु हर्षित संघवी का भव्य वरघोड़ा निकाला गया। सिरोही के सिरोड़ी गांव में बैंड-बाजों और जयघोष के बीच निकली शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। इस दौरान हर्षित ने वर्षीदान कर ग्रामवासियों का अभिनंदन स्वीकार किया। हर्षित 11 बहनों के इकलौते भाई हैं। दीक्षा से पूर्व बहनों हेमांगी, प्रियांशी, रूंजु, संयमी, सुविधि, हितांशी, जिनागी, तीर्था, तिथि, ध्यानी सहित सभी ने भावुक होकर कहा कि भाई ने जिनवर के बताए संयम मार्ग को अपनाकर पूरे परिवार का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने परमात्मा से स्वयं को भी चारित्र मार्ग प्राप्त होने की प्रार्थना की।

आचार्यश्री का हुआ भव्य सामैया:

शुक्रवार सुबह पंच महाजन संघ सिरोड़ी एवं आयोजक संघवी परिवार की ओर से आचार्य रविरत्नसूरी महाराज का भव्य सामैया किया गया। गाजे-बाजे के साथ संत-साध्वी भगवंतों का स्वागत किया गया। जब चतुर्विध संघ मुमुक्षु हर्षित के घर आए तो पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। आबूगोड़ क्षेत्र का सिरोड़ी गांव अपनी धार्मिक परंपराओं और संयम संस्कारों के लिए विशेष पहचान रखता है। गांव से अब तक 17 मुनिराज और 34 साध्वियां सहित कुल 51 मुमुक्षु दीक्षा ग्रहण कर चुके हैं। हर्षित संघवी इस गौरवशाली परंपरा की 52वीं कड़ी बनेंगे।

महापूजन और अंतिम वायणा:

दीक्षा महोत्सव के तहत शुक्रवार को गोडीजी पार्श्वनाथ मंदिर में सिद्धचक्र महापूजन का आयोजन हुआ। संघवी परिवार ने अपने पूर्वजों के आत्मश्रेयार्थ एवं माता-पिता के जीवित महोत्सव के उपलक्ष्य में विशेष धार्मिक आयोजन करवाए। बड़ी संख्या में आबूगोड़ जैन समाज और प्रवासी श्रद्धालु इसमें शामिल हुए। दीक्षा से पूर्व मुमुक्षु हर्षित संघवी ने सांसारिक जीवन का अंतिम भोजन (अंतिम वायणा) ग्रहण किया। अब शनिवार को वे सांसारिक जीवन का त्याग कर आजीवन संयम और साधु जीवन की राह पर अग्रसर होंगे।

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