5 बार पार्षद रह चुके राकेश भाटी ने जयपुर में थामा कांग्रेस का हाथ, पाली की राजनीति में बढ़ी हलचल
जयपुर/पाली। राजस्थान में आगामी निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी बीच पाली में भारतीय जनता पार्टी को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। भाजपा से निष्कासित किए जा चुके वरिष्ठ नेता और पाली भाजपा के पूर्व जिला महामंत्री राकेश भाटी ने शनिवार को जयपुर में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली।
जयपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राकेश भाटी को कांग्रेस का दुपट्टा पहनाकर पार्टी में स्वागत किया। इस दौरान पाली विधायक भीमराज भाटी, कांग्रेस जिलाध्यक्ष शिशुपाल सिंह राजपुरोहित सहित कई पार्टी नेता मौजूद रहे।
35 साल तक भाजपा से जुड़े रहे राकेश भाटी
राकेश भाटी का पाली की स्थानीय राजनीति में लंबा अनुभव रहा है। वह करीब 35 वर्षों तक भाजपा से जुड़े रहे और पांच बार पार्षद निर्वाचित हुए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्होंने 1999, 2004, 2009, 2014 और 2019 में पार्षद के रूप में चुनाव जीता।
इसके अलावा वे वर्ष 2004 में नगर परिषद के उपसभापति रहे और वर्ष 2009 में नगर परिषद में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी भी संभाली। वर्ष 2007 में करीब साढ़े तीन महीने तक सभापति के पद पर भी रहे।
राकेश भाटी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री पीपी चौधरी के साथ करीब एक दशक तक उनके प्रतिनिधि के रूप में भी कार्य किया है। उनकी पत्नी रेखा भाटी पाली नगर निगम की निवर्तमान महापौर हैं।
भाजपा से नाराजगी के बाद कांग्रेस का रुख
कांग्रेस में शामिल होने के बाद राकेश भाटी ने भाजपा से अपनी नाराजगी भी जाहिर की। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर जयपुर जाने के बाद उनके खिलाफ राजनीतिक षड्यंत्र किया गया और उन्हें तथा उनकी पत्नी रेखा भाटी को पार्टी से निष्कासित करवाया गया।
राकेश भाटी ने कहा कि अब वह कांग्रेस के साथ रहकर पालीवासियों की सेवा करने का प्रयास करेंगे।
निकाय चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल
पाली में निकाय चुनाव नजदीक आने के साथ ही राकेश भाटी का कांग्रेस में जाना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लंबे समय तक भाजपा में सक्रिय रहे और स्थानीय राजनीति में मजबूत पकड़ रखने वाले भाटी के कांग्रेस में जाने से चुनावी समीकरणों पर असर पड़ने की चर्चा शुरू हो गई है।
पाली राजस्थान भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ का गृह जिला भी है। ऐसे में वरिष्ठ स्थानीय नेता का दल बदलना भाजपा के लिए चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि चुनावी परिणाम पर इसका वास्तविक असर कितना पड़ेगा, यह आने वाले समय में प्रत्याशियों के चयन और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के बाद ही स्पष्ट होगा।
पोकरण में भी हुआ था राजनीतिक दल-बदल
इससे पहले 27 अगस्त को जैसलमेर जिले के पोकरण में भी राजनीतिक दल-बदल देखने को मिला था। पोकरण नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंदीलाल गुचिया भाजपा में शामिल हुए थे। बताया गया कि गुचिया करीब 11 वर्षों तक पोकरण नगर पालिका के अध्यक्ष रहे हैं।
राजस्थान में निकाय चुनाव से पहले लगातार सामने आ रहे इन राजनीतिक बदलावों ने दोनों प्रमुख दलों की चुनावी तैयारियों और स्थानीय समीकरणों को लेकर चर्चाओं को तेज कर दिया है।