जयपुर | 27 जुलाई 2026 राजस्थान में सरकारी भर्तियों में कथित फर्जी डिग्रियों के इस्तेमाल से जुड़े बड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद जांच को नई गति मिली है। शीर्ष अदालत ने राजस्थान SOG की याचिका पर सुनवाई करते हुए पहले से मिले अंतरिम संरक्षण पर रोक लगाई है, जिससे जांच एजेंसी अब मामले की विस्तृत जांच आगे बढ़ा सकेगी।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, मध्य प्रदेश की श्री सत्य साई यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मेडिकल साइंसेज और उत्तराखंड की हिमालयन गढ़वाल यूनिवर्सिटी से जारी कुछ बीपीएड सहित अन्य डिग्रियों के जरिए सरकारी भर्तियों में अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। इन आरोपों की सत्यता की जांच SOG कर रही है।
अब तक की कार्रवाई में करीब 30 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि 300 से अधिक संदिग्ध अभ्यर्थियों की भूमिका की जांच जारी है। जनवरी 2026 में SOG ने मध्य प्रदेश स्थित एक विश्वविद्यालय परिसर में छापा मारकर कई दस्तावेज, संदिग्ध डिग्रियां, मुहरें और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए थे।
राजस्थान SOG के एडीजी विशाल बंसल के अनुसार, अदालत से मिली राहत के बाद अब दोनों विश्वविद्यालयों के जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मचारियों और कथित बिचौलियों से पूछताछ की जाएगी। जांच के आधार पर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और सरकारी सेवा से हटाने जैसी प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर 2026 निर्धारित की है। तब तक SOG को जांच जारी रखने की अनुमति मिली है।
मुख्य बातें:
सुप्रीम कोर्ट ने SOG जांच का रास्ता किया साफ।
दो विश्वविद्यालयों से जुड़ी डिग्रियों की होगी गहन जांच।
अब तक 30 गिरफ्तार, 300+ संदिग्ध जांच के दायरे में।
अगली सुनवाई 7 सितंबर 2026 को।